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नारायणपुर । जिले के अबूझमाड़ में ओरछा ब्लॉक की 11 वैकल्पिक शालाओं जिसमें तोके, घमंडी, नेलांगुर और हितावाडा जैसे संवेदनशील गांवों में इन दिनों स्कूल केइंता (स्कूल बुलाओ) अभियान चल रहा है। इसके तहत सामुदायिक आनंद मेला और समर कैंप अब अंदरूनी गांवों में सामाजिक जागरूकता और व्यापक सामुदायिक भागीदारी का बड़ा माध्यम बन रहे हैं। आयोजन की खास बात यह है कि बच्चों के साथ उनके माता-पिता, बुजुर्ग परिजन भी बढ़-चढ़कर शामिल हो रहे हैं।
अबूझमाड़ के हितावाडा सोमवार को आयोजित इन कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने पारंपरिक आदिवासी संस्कृति को सहेजते हुए आधुनिक शिक्षा को अपनाने का मजबूत संदेश दिया। मांदर, ढोल और ककसार लोकनृत्य की थाप के बीच बच्चों ने खेल-खेल में सीखने की विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। सबसे सकारात्मक परिणाम हितावाडा गांव से सामने आया, जहां ग्रामीणों की बैठक में परिजनों ने अपने बच्चों को नियमित तौर पर स्कूल भेजने की लिखित सहमति दी। अगले शिक्षा सत्र में गांव के 10 बच्चों के शाला में शत प्रतिशत नामांकन का प्रस्ताव रखा। आनंद मेले में बच्चों के लिए पेंटिंग, पारंपरिक मिट्टी कला, कहानी लेखन और स्टोरी टेलिंग जैसी विधाएं आकर्षण का केंद्र रहीं।
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