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00 पारंपरिक विद्युत उत्पादन पर निर्भरता होगी कम
रायपुर/बिलासपुर। हरित रेलवे संचालन की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, भारतीय रेल ने उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में सोलर-असिस्टेड यात्री कोच विकसित किया है। यह पहल ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी को पारंपरिक रेलवे कोचिंग स्टॉक के साथ एकीकृत करने को दर्शाती है।
विद्युत उत्पादन की पारंपरिक पद्धति क्या है?
परंपरागत रूप से, आईसीएफ यात्री कोचों में विद्युत शक्ति का उत्पादन कोच के नीचे लगाए गए एक्सल-चालित अल्टरनेटर के माध्यम से किया जाता है। कोच के एक्सल से जुड़े बेल्ट सिस्टम के माध्यम से यांत्रिक रूप से संचालित यह अल्टरनेटर कोच की बैटरी बैंक को चार्ज करता है और प्रकाश व्यवस्था, पंखे तथा मोबाइल चार्जिंग जैसी यात्री सुविधाओं के लिए विद्युत आपूर्ति करता है। यह प्रणाली दशकों से भारतीय रेल के लिए प्रभावी रूप से कार्य कर रही है, हालांकि यह ट्रेन की गति पर निर्भर करती है तथा इसमें यांत्रिक और विद्युत रूपांतरण के दौरान ऊर्जा हानि होती है।
सोलर कोच कैसे कार्य करेगा?
सोलर-असिस्टेड कोच इस व्यवस्था को और बेहतर बनाता है। कोच की छत पर लगाए गए उच्च दक्षता वाले सोलर फोटोवोल्टिक पैनल सूर्य के प्रकाश से सीधे विद्युत उत्पन्न करते हैं और कोच की बैटरी बैंक की चार्जिंग में अतिरिक्त योगदान देते हैं। दिनभर उपलब्ध सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए यह प्रणाली पारंपरिक एक्सल-चालित विद्युत उत्पादन पर निर्भरता कम करती है और ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद करती है।
पायलट कोच में लगभग 7 किलोवाट-पीक क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है, जो कोच की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करेगा। ऊर्जा संरक्षण में योगदान के साथ-साथ यह प्रणाली पारंपरिक चार्जिंग व्यवस्था पर पडऩे वाले भार को कम करेगी और ऑनबोर्ड विद्युत सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाएगी।
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