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रायपुर,--

बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उलनार निवासी महेश नाग की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही मार्गदर्शन मिले और व्यक्ति में कड़ी मेहनत का जज्बा हो, तो जीवन की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। पूर्व में केवल खेती और मजदूरी पर आश्रित रहने वाले महेश के पास आजीविका के साधन के रूप में कुछ दुधारू मवेशी जरूर थे, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पशुओं के सुरक्षित आवास की थी। पक्का शेड न होने के कारण मवेशियों को कच्चे और जर्जर शेड में रखना पड़ता था, जहां अत्यधिक ठंड, तेज धूप और मूसलाधार बारिश के चलते वे लगातार बीमार पड़ जाते थे। पशुओं के अस्वस्थ रहने से दूध उत्पादन में भारी गिरावट आ गई थी, जिसके कारण महेश को पशुपालन से कोई ठोस आर्थिक संबल नहीं मिल पा रहा था।
परिवार की इस गंभीर समस्या और संघर्ष को देखते हुए ग्राम पंचायत उलनार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में उनकी निजी जमीन पर दुधारू पशु शेड निर्माण की स्वीकृति दी गई। कुल एक लाख 49 हजार रुपये की स्वीकृत लागत से पंचायत के तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हवादार, पक्के फर्श और सर्वसुविधायुक्त शेड का निर्माण 16 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक पूरा कराया गया। अनुकूल और सुरक्षित वातावरण मिलते ही मवेशियों की सेहत सुधरने लगी, जिससे दूध उत्पादन में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज हुआ।
उत्पादन में हुई इस बढ़ोतरी ने महेश के आत्मविश्वास को नई उड़ान दी और उन्होंने इसे एक सुव्यवस्थित व्यवसाय में तब्दील कर दिया। अब वे प्रतिदिन सुबह और शाम जगदलपुर के आसपास के ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खुद घर-घर जाकर शुद्ध व ताजा दूध का वितरण करते हैं। उनकी इस निष्ठा, समयबद्धता और गुणवत्ता के कारण ग्राहकों के बीच उनकी एक विश्वसनीय पहचान बन चुकी है।
इस निरंतर आमदनी ने उनके जीवन में एक और बड़ा बदलाव ला दिया। मनरेगा के तहत बने पशु शेड से प्राप्त आय और प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली वित्तीय सहायता के सफल संयोजन से महेश अपने परिवार के लिए एक नया और पहले से काफी बड़ा पक्का मकान बनाने में सक्षम हो पाए हैं। योजनाओं के इस प्रभावी तालमेल को अपनी सफलता का आधार बताते हुए महेश नाग कहते हैं कि मनरेगा से बना यह पशु शेड उनके परिवार के लिए वरदान साबित हुआ है। पहले बीमारियों से नुकसान झेलने वाले महेश अब खुद घूम-घूमकर दूध बांटते हुए मजबूत आय अर्जित कर रहे हैं और पक्के मकान के निर्माण के साथ अपने परिवार को सुरक्षित भविष्य दे पा रहे हैं, जिसके लिए वे प्रशासन व दोनों जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। आज महेश नाग की यह यात्रा क्षेत्र के अन्य छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए स्वावलंबन की सशक्त प्रेरणा बन गई है।
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