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0-आज जन्म दिन पर विशेष
बलराज दत्त फिल्मों में रेलवे प्लेटफॉर्म फिल्म के जरिए आए थे, उनका नया नामकरण हुआ सुनील दत्त। नाम बदलने का कारण उनसे पहले बलराज साहनी का नाम था। सुनील दत्त ऐसे कलाकार रहे जो चार दशक तक फिल्मों में काम किया।
वे पहले फिल्मी नायक रहे जिन्होंने राजनीति में भी किस्मत आजमाया और सफल होने के साथ साथ ईमानदार राजनीतिज्ञ भी रहे। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में उन्हें पश्चिम मुंबई से कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया गया। सुनील दत्त और अमिताभ बच्चन पहले दो ऐसे बॉलीवुड फिल्म कलाकार थे जो प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से लोक सभा चुनाव में जीते थे। सुनील दत्त ..राम जेठमलानी और संजय निरुपम को चुनाव में पराजित करने का भी श्रेय रखते है। सुनील दत्त, पहले बॉलीवुड कलाकार थे जो मनमोहन सिंह की सरकार में खेल एवं युवा मामले के मंत्री भी रहे थे।
आम दर्शकों के सुनील दत्त मंजे हुए फिल्म अभिनेता थे। मदर इंडिया के डाकू बिरजू ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। डाकू की भूमिका में सुनील दत्त इतने जचे कि आने वाले सालों में कई फिल्मों में डाकू ही बने। मुझे जीने दो, हीरा, प्राण जाए पर वचन न जाए, बदले की आग, डाकू और जवान सहित रेशमा और शेरा उनके डाकू भूमिका के लिए जाना जाता है।
सुनील दत्त की कद काठी जितनी डाकू के लिए दमदार थी उतनी ही अन्य भूमिकाओं के लिए भी थी। मेरा साया, सुजाता, खानदान, गुमराह, व$क्त, मिलन, मेहरबान,हमराज, जख्मी, 36 घंटे, नागिन ऐसी फिल्मे है जिनमें सुनील दत्त को देखा जा सकता है। सुनील दत्त के कैरियर में उनको हास्य भूमिका में देखना हो तो पड़ोसन सदाबहार फिल्म है। भोले के भूमिका को महमूद और किशोर कुमार के बीच में जीना कठिन काम था। चरित्र अभिनेता के रूप में सुनील दत्त आखिरी बार मुन्नाभाई एम बी बी एस में अपने ही बेटे संजय दत्त के पिता हरि प्रसाद शर्मा की भूमिका में दिखे थे।
पारिवारिक रूप से सुनील दत्त, नरगिस के पति और संजय दत्त के पिता थे।राजनीति में उनकी विरासत बरखा दत्त को मिली जो मुंबई पश्चिम से सांसद निर्वाचित हुई थी।
* * संजय दुबे
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