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रायपुर-नई दिल्ली। डीएमएफ घोटाला प्रकरण में पिछले ढाई साल से सलाखों के पीछे रहने वाले पूर्व आईएएस अफसर अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राहत देते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली। इसी के साथ उन्होंने यह आदेश भी दिया कि जमानत अवधि में उन्हें सूबे से बाहर रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद उन्हें मंगलवार को रिहा किया जाना है। लेकिन वहीं दूसरी ओर एसीबी ईओडब्ल्यू ने सोमवार को रायपुर के विशेष न्यायालय में इसी मामले को लेकर पूरक चालान पेश किया है ताकि टूटेजा को किसी भी प्रकार से सलाखों से बाहर ना आने दिया जाए।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की माननीय चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एकल बेंच ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की जमानत प्रकरण पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। आरोपी अनिल टुटेजा की ओर से उनके वकील ने माननीय न्यायालय को जानकारी देते हुए बताया कि वे पिछले ढाई साल से जेल में बंद है। मामले में 85 गवाह हैं और आरोपी ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। वकील ने यह भी तर्क दिया गया कि टुटेजा उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव थे और ठेके से संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा आदेश जारी किए जाते रहे हैं, इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।
वकील के इस तर्क पर माननीय न्यायालय ने टुटेजा को सशर्त जमानत देते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने आदेश दिए कि जमानत अवधि के दौरान टुटेजा को छत्तीसगढ़ के बाहर रहना हो ताकि वे गवाहों को प्रभावित ना कर सके। साथ ही उन्हें एक हफ्ते के भीतर नया पता देने और हर सुनवाई की तारीख पर अदालत में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय हैं कि अनिल टुटेजा को शराब और अन्य प्रकरणों में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
दूसरी ओर अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने सोमवार को विशेष न्यायालय में पूरक चालान का पुलिंदा पेश किया। जो बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले से संबंधित है। इस चालान में अनिल टुटेजा और महासमुंद के कारोबारी सतपाल छाबड़ा के भूमिका को लेकर खुलासे किए गए हैं।
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