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00 घने जंगलों और पहाड़ों के बीच पहली बार चमके बिजली के बल्ब
00 ग्रामीणों ने कहा- यह किसी चमत्कार से कम नहीं
रायपुर। छत्तीसगढ़ के धोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में शामिल सुकमा जिले के पुसगुड़ा गांव में आखिरकार विकास का नया सूरज उगा है। वर्षों के लंबे इंतजार के बाद गांव के 106 घरों में पहली बार बिजली का कनेक्शन पहुँचा है। कोंटा विकासखंड के अंतर्गत घने जंगलों और दुर्गम पहाडिय़ों के बीच बसे इस गांव के लिए यह महज एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है।
साहस और संकल्प की जीत
जिला मुख्यालय से लगभग 108 किलोमीटर दूर स्थित पुसगुड़ा तक पहुँचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। कच्चे रास्ते, ऊंची चढ़ाई और दलदली पगडंडियों के कारण यह क्षेत्र दशकों तक मुख्यधारा से कटा रहा। प्रशासन ने इस दुर्गम कार्य को श्मिशन मोडश् में हाथ में लिया और विभाग की टीम ने मानव श्रम व स्थानीय सहयोग से खंभे और तार जंगलों के पार पहुँचाए।

कलेक्टर का वक्तव्य
सुकमा कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि पुसगुड़ा तक बिजली पहुँचाना प्रशासन की प्रतिबद्धता और जनहित के संकल्प की परीक्षा थी। यह केवल उजाला नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और गांव के आत्मविश्वास का नया सवेरा है। शासन की प्राथमिकता अंतिम छोर पर बसे हर गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुँचाना है।
बदलेगी ग्रामीणों की जिंदगी
गांव की निवासी श्रीमती सुन्नम लक्ष्मी ने भावुक होते हुए कहा कि गांव में बिजली आना उनके लिए किसी चमत्कार जैसा है। अब गांव में टीवी, पंखा और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी और बच्चों की पढ़ाई रात में भी सुगम हो सकेगी। वर्षों से लालटेन की मद्धम रोशनी पर निर्भर रहने वाला पुसगुड़ा अब आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहा है।
ऐतिहासिक उपलब्धि
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कार्यपालन अभियंता हिलोन ध्रुव ने बताया कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जहाँ मशीनें नहीं पहुँच सकीं, वहाँ विभागीय टीम ने कड़ी मेहनत कर समयबद्ध तरीके से लाइन विस्तार का कार्य पूर्ण किया।
ग्रामीणों ने जताया आभार
छत्तीसगढ़ के सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई किरण देखने को मिल रही है। हाल ही में, बस्तर क्षेत्र के बेहद दुर्गम गांव पुसगुड़ा में आज़ादी के दशकों बाद पहली बार बिजली पहुँचने से वहां की रातों का अंधेरा दूर हुआ है। गांव में बिजली पहुँचने पर मुंदराजू, सुन्नम रामे, तोड़म सच्चू और अन्य ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक कार्य के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।
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