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रायपुर। यानी कल को हमारे बच्चों को लाड़ करने के लिए चाचा- चाची, बुआ- फूफा, मामा- मामी, मौसी- मौसा होंगे ही नहीं। बस हमें ही अपने बच्चों को प्यार करना होगा, कौतुक करना होगा। बैचेन युवा कलाकार की यह वेदना हमारे समाज के भविष्य का आईना है, जिसे आप महाराष्ट्र मंडल में बुधवार, चार नवंबर को महसूस कर सकेंगे। संत ज्ञानेश्वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर स्मृति रंगमंच पर शाम सात बजे को मंचित होने वाले मराठी नाटक सेलिब्रेशन का हर एक वाक्य वर्तमान परिस्थितियों में परिवार और समाज के जर्जर होते संबंधों को पूरी ईमानदारी से दिखाता और गहराइयों से अहसास भी कराता है।
प्रशांत दळवी लिखित व प्रसन्न निमोणकर निर्देशित सेलिब्रेशन की इन दिनों जोरदार रिहर्सल जारी है। वरिष्ठ रंगसाधक अनिल श्रीराम काळेले के मार्गदर्शन में पहली बार युवा कलाकार प्रांजल बक्षी और अथर्व महावादी रंगमंच की दुनिया में कदम रखेंगे। केंद्रीय पात्र परिवार के मुखिया भाई की भूमिका को निर्देशक प्रसन्न निमोणकर स्वयं जीवंत करेंगे। उनकी पत्नी आई के रोल में प्रिया बक्षी होंगी। परिवार के अन्य सदस्यों पवन ओगले (बाळ), गौरी क्षीरसागर (सुजाता), गणेश जाधव पाटील (दीपक), कीर्ति हिशीकर (वीणा), सुधांशु नाफड़े (वीजू) का रंगमंच पर साक्षात्कार होगा।
घर से भागी हुई इकलौती बेटी मंजू की भूमिका कुंतल काळेले और उनके काउंसलर गैर मराठी पति अभिषेक गुप्ता का रोल रविंद्र ठेंगड़ी कर रहे हैं। नाटक में सहायक निर्देशक पराग दलाल, सेट अजय पोतदार, प्रकाश गुरव, प्रकाश व ध्वनि संयोजन प्रवीण क्षीरसागर का और संगीत परितोष डोनगांवकर का होगा। रूप सज्जा वंदना निमोणकर, वर्तिका क्षीरसागर व वेशभूषा की जिम्मेदारी अपर्णा काळेले पूरा करेंगी।
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