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00 कथा हमको संस्कार देती है,जो जीवन न बदल दे वो कथा ही क्या
रायपुर। संस्कार में बहुत शक्ति हैं-बहुत बड़ी ताकत है। लेकिन अब कहां,बेटियों को पढ़ाने व डिग्रियां दिलाने पर पूरा जोर लगा रहे हैं। पढ़ाई कराएं अच्छी बात हैं,पर संस्कार भी तो दें। संस्कार दे नहीं पा रहे हैं इसीलिए तो गृहस्थ जीवन में ग्रहण लग गया है,न जाने सुख कहां खो गया है, गृहस्थ जीवन के संबंध टूटने लगे हैं। सुख तलाशने बाबाओं के पास जा रहे हैं,जंतर-मंतर का सहारा ले रहे हैं। केवल पैसा कमाने में ही पूरा परिवार लगा हुआ है। कथा हमको संस्कार देती है, जो जीवन न बदल दे वो कथा क्या है? आज तो कथा को भी सस्ता बना दिया गया है, कथा श्रवण कम बल्कि व्यवस्था, सुविधा, भीड़, प्रसाद, मनोरंजन को को कथा से तौला जाता है। कथा को यदि पारिवारिक व धार्मिक जीवन में उतारोगे तो सुख मिलेगा।
मैक कॉलेज ऑडिटोरियम समता कालोनी के श्रीराम कथा में गुरुवार को संत शंभूशरण लाटा महाराज ने श्रीराम सीता विवाह प्रसंग के बीच विदाई की बेला की बड़ी ही मार्मिक व्याख्या करते हुए बताया कि राजा जनक अपनी बेटियों को विदा करते हुए राजा दशरथ से कह रहे हैं कि यदि कोई गलती इनसे हो जाए तो हमारे संस्कार में कोई कमी रह गई है यह समझ कर इन्हे माफ कर दें। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने विवाह प्रसंग के माध्यम से भी संसार को बड़ा संदेश दिया है। नारी के लिए पति ही परमात्मा है। एक समय था जब भारत की पहचान संस्कारों से होती थी। यदि बात हम दो परिवारों के बीच रिश्ता जोडऩे वाली बेटियों की करें तो उनका संस्कारी होना बहुत ही जरूरी है। लेकिन आज के समय बेटियों को सिर्फ डिग्रियां दिलाने की होड़ मची हुई है, पढ़ाईए अच्छी बात हैं। पैसा कमाना भी अच्छी बात है पर संस्कार देना न भूलें। संस्कार के अभाव में आज संबंध टूट रहे हैं, लोग सुखी नहीं हैं। पति-पत्नी दोनों कमा रहे हैं पर पैसा सुख नहीं दे पा रहा है। घर में अशांति हैं,तनाव हैं और लोग बाबाओं के पास सुख तलाशने जा रहे हैं। प्रार्थना व संस्कार में बड़ी शक्ति व ताकत है। कुछ सीखो, कुछ अपना कर देखो। जो कथा जीवन न बदल दे वो किस काम की। उसे पारिवारिक-धार्मिक जीवन में उतार कर देखो, सुख व शांति मिलेगी।
संत श्री ने आगे कहा कि ये वही रायपुर हैं जहां बरसों से कथा करने वे आ रहे हैं,उनकी पहली कथा भीमसेन भवन में हुई थी तब उन्होने व्यासपीठ से कहा था कि कथा से जाते समय अपने कोई गलती-खामी छोड़कर जाएं। अंतिम दिन बोरों में पर्चियां भर गई थी। पहले के लोगों में कथा के प्रति भाव होता था अब कहां? सजावट व प्रसाद में तब्दील हो चुकी कथा में भाव नहीं रहा। कथा को सस्ता बना दिया है। सस्ता से तात्पर्य कथा में तामझाम,व्यवस्था,सुख सुविधा का आकलन किया जाने लगा है। इसलिए उन्होने भी बोलना बंद कर दिया है। कथा संस्कार देती है, सुनकर अपने जीवन को कुछ तो बदलो।
विवाह के फेरों का बताया महत्व
विवाह में अग्नि को साक्षी मानकर चार फेरे लेते हैं। पहला फेरा धर्म का है जिसका अर्थ है हम पति-पत्नी आज से धर्म का आचरण करेंगे। दूसरा फेरा अर्थ का है और बिना अर्थ के गृहस्थ कैसे चलेगा। तीसरा फेरा काम का है, लोग काम को कितनी गालियां देते है कि बुरा है काम, लेकिन काम के बिना संसार नहीं चलता है इसलिए काम को महत्व दिया गया है। मर्यादा में रहें तो काम अच्छा है, तोड़े तब बुरा है। चौथा फेरा मोक्ष का है क्योंकि बिना भजन के मोक्ष की प्राप्ति नहीं की जा सकती है। सिंदूर की बड़ी महिमा है, सिंदूर देवाताओं को चढ़ता है, भगवान गणेश, हनुमान, भगवती माँ जगदम्बा को सिंदूर चढ़ता है।
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