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00 संवत्सरी महापर्व - मन व विचारों से पाप करने से बचें , पर्यावरण संरक्षण करें , साधर्मिक सहयोग , मानव कल्याण व जीवदया , ये पांच सूत्र का संकल्प लें - जैन संवेदना ट्रस्ट
रायपुर। संवत्सरी महापर्व वर्षभर के भूलों की क्षमा मांगने के साथ ही आत्मावलोकन का पर्व है । वर्षभर में मैंने जीवन कैसे जिया क्या अच्छे कार्य किये व क्या पाप के कार्य किये , शासननायक भगवान महावीर स्वामी ने हमें प्रतिवर्ष आत्मचिंतन व अगले वर्ष के लिए सावधान होने का संदेश दिया है । जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर व विजय चोपड़ा ने संवत्सरी महापर्व पर प्रभु महावीर के संदेश आधरित वर्षभर के लिये 5 सूत्र आत्मचिंतन व जीवन जीने के लिए प्रस्तुत किये हैं । आत्मा के संसार भ्रमण में मन वचन काया से कर्म बंध व निर्जरा के अवसर प्राप्त होते हैं । पाप पुण्य सभी मन वचन काया से ही होते हैं , संवत्सरी दिवस में वर्षभर का चिंतन करें कि क्या क्या अच्छे व बुरे कार्य मैंने किये उनकी क्षमा मांगने के साथ ही अगले वर्ष के लिए दृढ़ निश्चय करना है , विचार करेंगे तो ज्ञात होता है कि अधिकतम पाप कर्म केवल विचारों से , सोचने से होता है । वचन व क्रिया से पाप कम ही होते हैं हम सोच सोच कर बिना क्रिया के ही पाप का बंध कर लेते हैं । अतः अपने मन में दृढ़ संकल्प करें कि विचारों से कम से कम पाप करूंगा लेकिन सदैव अच्छे विचारों में रहते हुए पुण्य कर्मों का बंध करते रहूंगा ।
अच्छे विचारों में रहने के लिए सदैव नियमों से बंधे रहें नवकारसी से लेकर उपवास तक कि तपस्या व अन्य जीवन को निर्मल करने छोटे छोटे नियमों में रहकर वर्षभर की दिनचर्या रखें ।
जैन धर्म में वनस्पति में जीव है बताया गया है , भगवान महावीर स्वामी देशना देने समवसरण में पधारकर सर्वप्रथम आशोकवृक्ष की तीन प्रदक्षिणा देकर आसन ग्रहण करते हैं , एकेन्द्रिय में जीव है , यह विश्व को पर्यावरण संरक्षण का बहुत बड़ा संदेश है । महावीर स्वामी ने संसार को वनस्पति के उपयोग में भी संवेदना रखने का संदेश देकर पर्यावरण की ओर संकेत दिया है । हम भाई बहनों को भी वर्षभर वनस्पति के उपयोग में सावधानी बरतने व प्रत्येक पखवाड़े में पांच तिथियों में लिलोती का उपयोग नही करना चाहिए । हम वर्षभर धन अर्जन करते हैं व्यय करते हैं धार्मिक आयोजनों में अपनी लक्ष्मी का सदुपयोग करते हैं लेकिन आत्म चिंतन में स्वधर्म के भाई बहनों की कठिनाइयों की तरफ़ भी हमारा ध्यान जाना चाहिए सर्वप्रथम अपने कमजोर रिश्तेदार फिर स्वधर्मी भाई बहनों की मदद का प्रयास सदैव तत्परता से करने का लक्ष्य होना चाहिये । जियो और जीने दो यह भगवान महावीर का शुभ संदेश है वर्षभर की दिनचर्या में मानव जगत के किये व सभी जीवों के प्रति दया करुणा के भाव सदा बने रहने चाहिए । एक वाक्य में हमारा जीवन जयणा पूर्वक होना चाहिये । संवत्सरी महापर्व हमें अपने वर्षभर के जीवन पर चिन्तन कर भूलों की क्षमापना व आगामी वर्ष के लिए आत्मावलोकन का संदेश है ।
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