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शिक्षकों की कमी से नाराज पालकों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर लगाया ताला

28 Jul 2026   10 Views

शिक्षकों की कमी से नाराज पालकों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर लगाया ताला

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00 बस्तर संभाग में शिक्षक के 42 हजार स्वीकृत पद, 11 हजार पद वर्षों से खाली 
कोंडागांव । जिले के माकड़ी विकासखंड के ग्राम अमोड़ीपारा (रांधना) स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षकों की कमी को लेकर मंगलवार को पालकों ने विरोध स्वरूप नाराज पालकों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और शिक्षक की नियुक्ति होने तक स्कूल काे बंद रखने की चेतावनी दी। पालकों का कहना है कि विद्यालय पिछले तीन वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। मूल पदस्थ प्रधान पाठक श्रीमती गीता पांडे के संलग्नीकरण के बाद से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पालकों ने बताया कि इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। 
स्कूल में तालाबंदी की जानकारी मिलने के बाद दोपहर करीब 12 बजे माकड़ी विकासखंड शिक्षा अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पालकों से चर्चा कर ताला खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी। पालक शिक्षक की तत्काल नियुक्ति की मांग पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए फरसगांव थाना प्रभारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और पटवारी भी मौके पर मौजूद रहे। हालांकि पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण बना रहा। 
पालकों में बुधेश्वर प्रधान एवं विजय कुमार ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती, तब तक तालाबंदी और विरोध जारी रहेगा। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर है।
उल्लेखनिय है कि बस्तर संभाग के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी अब शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। बस्तर संभाग में प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक समेत 42 हजार से अधिक स्वीकृत पद हैं, लेकिन लगभग 11 हजार पद वर्षों से खाली पड़े हैं। सेवानिवृत्ति और तबादलों के बाद रिक्त हुए पदों पर नई नियुक्तियां नहीं होने से स्कूलों में पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। अधिकारियाें के द्वारा भर्ती का निर्णय शासन स्तर का बताकर जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले बस्तर जिले के 298 प्राथमिक विद्यालय आज भी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों की कमी का सबसे अधिक असर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में दिखाई दे रहा है। एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं की पढ़ाई, स्कूल का प्रशासनिक कार्य, अभिलेख संधारण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।

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