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00 डाक्टर्स डे पर एम्स ने किया अपने इस पूर्व छात्र का सम्मान
रायपुर। समय में जब अधिकांश युवा चिकित्सक महानगरों और कॉर्पोरेट अस्पतालों में अपना करियर बनाना चाहते हैं, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के वर्ष 2019 बैच के एमबीबीएस पूर्व छात्र डॉ. अविनाश मेहरा ने सेवा और समर्पण का एक अनूठा रास्ता चुना है। वर्ष 2025 में एम्स रायपुर से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने शहरों में उपलब्ध आकर्षक अवसरों को दरकिनार करते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दूरस्थ आदिवासी जिले नारायणपुर में सेवाएं देने का निर्णय लिया। उनका यह कदम समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
डॉ. मेहरा जुलाई 2025 से धनवंतरी जन कल्याण समिति के अंतर्गत नारायणपुर में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मूल रूप से कोटपूतली, जयपुर (राजस्थान) के निवासी डॉ. मेहरा अपने इस निर्णय का श्रेय राष्ट्र निर्माण के लिए कार्यरत सामाजिक संगठन सेवांकुर भारत को देते हैं, जिससे वे पिछले तीन वर्षों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में वे सेवांकुर भारत के छत्तीसगढ़ प्रांत संपर्क प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उनका यह समर्पण कोई नया नहीं है; उन्होंने अपनी इस नियुक्ति से पहले ही वर्ष 2025 में जशपुर नगर में आयोजित वन वीक फॉर नेशन तथा अक्टूबर 2025 में तेलंगाना के भद्राचलम में आयोजित थ्री डेज़ फॉर नेशन जैसे जनस्वास्थ्य अभियानों में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी।
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के विशेष अवसर पर, डॉ. मेहरा की यह यात्रा देशभर के युवा चिकित्सकों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा बनकर उभरी है। उन्होंने यह साबित किया है कि चिकित्सा केवल एक पेशा या आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। बस्तर के सुदूर और चुनौतीपूर्ण आदिवासी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने और जरूरतमंद लोगों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का उनका यह निस्वार्थ प्रयास चिकित्सा सेवा के सर्वोच्च आदर्शों को चरितार्थ करता है।
इस अनुकरणीय पहल पर एम्स रायपुर में सेवांकुर भारत के तत्वावधान में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान डॉ. मेहरा को सम्मानित करते हुए एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि एम्स रायपुर का मूल उद्देश्य केवल तकनीकी रूप से कुशल चिकित्सक तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे संवेदनशील डॉक्टर बनाना है जो वहां सेवा दें जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता हो। उन्होंने आगे कहा कि डॉ. अविनाश मेहरा ने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर आदिवासी समाज की सेवा का जो निर्णय लिया है, वह देशभर के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने का उनका यह संकल्प एम्स रायपुर के जीवन मूल्यों का सच्चा प्रतिबिंब है, जिस पर पूरे संस्थान को गर्व है।
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