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00 नत्थानी परिवार 5 पीढिय़ों से बांट रहा निशुल्क मेडिसिन
रायपुर। राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक स्थित एचडीएन परिसर में शरद पूर्णिमा की रात रविवार को छत्तीसगढ़ के दूर-दराज इलाकों से लोग अस्थमा और सांस की परेशानी के लिए पारंपरिक जड़ी-बूटी की औषधि लेने पहुंचे। नत्थानी परिवार 160 साल से ज्यादा समय से निशुल्क औषधि बांट रहा है और यह उनकी पांचवीं पीढ़ी है जो नि:शुल्क मेडिसिन बांटने में लगे हुए है।
विनय नत्थानी ने बताया कि औषधि तैयार करने के लिए जड़ी-बूटियों की छाल सुखाकर उसका पाउडर बनाया जाता है। फिर छोटी-छोटी पुडिय़ां तैयार की जाती हैं। इस साल करीब 2 हजार लोग औषधि ले चुके हैं। औषधि को खीर में मिलाकर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। आधी रात को इसे खाने की परंपरा है। औषधि लेने वालों को तीन महीने तक तेल, मिर्च, गुड़, खटाई और मांसाहारी भोजन से परहेज की सलाह दी जाती है। लेकिन अस्थमा ठीक होने के दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। दुर्ग के रहने वाले 71 वर्षीय रघुवीर यादव ने बताया कि उन्हें पहले अस्थमा की परेशानी थी। रातभर खांसी आती थी और सांस लेने में दिक्कत होती थी। वे 25 से 30 साल से इस परंपरा के तहत औषधि लेने आ रहे हैं और जब से वे इन औषधियों का उपयोग कर रहे है उनकी अस्थमा हमेशा नियंत्रण में रहता है।
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