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00 दंडाधिकारीय जांच में ये मुद्दा शामिल नहीं
रायपुर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उनका दावा है कि ये बात सामने आ रही है कि एक घंटे में दो गुना उत्पादन करने के लिए बायलर का लोड़ तेजी से बढ़ाया गया था। यह लोड पूर्व में 350 मेगावाट था, जिसे बढ़ाकर 590 मेगावाट किया गया। यही वजह दुर्घटना का कारण बनी। यही नहीं उन्होंने ये भी कहा इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने दंडाधिकारीय जांच के 9 बिंदु जारी किए गए, लेकिन लोड़ बढ़ाने का विषय इसमें शामिल नहीं है।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के डभरा तहसील अंतर्गत सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर लिमिटेड में हुए भीषण हादसे के बाद जिला दण्डाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने इस दुर्घटना की विस्तृत न्यायिक जांच के संशोधित आदेश जारी कर दिए हैं ।
हादसे का विवरण
यह दुर्घटना 14 अप्रैल 2026 को प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में हुई थी । प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बॉयलर के स्टीम पाइप के वाटर सप्लाई पाइप के जॉइंट में तकनीकी खराबी आने के कारण यह हादसा हुआ । इस भयावह घटना में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें से 17 श्रमिकों की दुखद मृत्यु हो गई है ।
ये हैं जांच के बिंदु, लेकिन असली मुद्दा गायब
अनुविभागीय दण्डाधिकारी डभरा को जांच अधिकारी नियुक्त किया है । जांच मुख्य रूप से निम्नलिखित 9 बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी। लेकिन श्री अकबर का कहना है कि इन नाै बिंदुओ में बायलर का लोड़ 350 से 590 मेगावाट तक बढ़ाने का कोई जिक्र नहीं है। ये हैं जांच के बिंदु।घटना के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों का पता लगाना ।मृतक और घायल मजदूरों की विस्तृत जानकारी । बॉयलर निरीक्षक द्वारा प्लांट के पिछले निरीक्षणों का विवरण और जारी किए गए सर्टिफिकेट की वैधता ।औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा की गई पूर्व जांचों और पाई गई खामियों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा । यह निर्धारण करना कि घटना तकनीकी खराबी थी या मानवीय लापरवाही । हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करना । भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय और सुझाव देना ।
30 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
कलेक्टर ने जांच अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे 30 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें । इस आदेश की प्रतिलिपि गृह विभाग, मानव अधिकार आयोग, श्रम विभाग और उद्योग विभाग सहित सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है ताकि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जा सके ।
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