CNIN News Network

विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन

18 Apr 2026   9 Views

विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन

Share this post with:

00 महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में चित्र प्रदर्शनी व व्याख्यान—सोमनाथ से छत्तीसगढ़ के मंदिरों तक सांस्कृतिक यात्रा, आपदा के दौर में धरोहर संरक्षण पर जोर
रायपुर। संस्कृति विभाग अंतर्गत पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, रायपुर द्वारा विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में चित्र प्रदर्शनी एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं संचालक पुरातत्व एवं संस्कृति श्री विवेक आचार्य के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. रमेंद्रनाथ मिश्र, अतिथि वक्ता डॉ. राम सतीश पुसुपुलेटी तथा श्री पवन जोशी द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्वानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सहभागिता रही।
संचालनालय द्वारा प्रतिवर्ष विश्व धरोहर दिवस पर ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक स्थलों एवं परंपराओं के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी क्रम में इस वर्ष भी प्रदर्शनी और व्याख्यान के माध्यम से विरासत संरक्षण का संदेश दिया गया।

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय


कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणादायक पहल “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – अटूट आस्था के 1000 वर्ष” का अनुसरण करते हुए कला वीथिका में विशेष चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में सोमनाथ मंदिर के 19वीं, 20वीं और 21वीं सदी के चित्रों के माध्यम से उसके ऐतिहासिक विकास, स्थापत्य परिवर्तन और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव मंदिरों की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करते चित्र भी आकर्षण का केंद्र रहे। स्थानीय धरोहरों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से जोड़ने का यह प्रयास दर्शकों के लिए विशेष रूप से ज्ञानवर्धक रहा।
इस वर्ष विश्व धरोहर दिवस 2026 की थीम “इमरजेंसी रिस्पॉन्स फॉर लिविंग हेरिटेज इन कॉन्टेक्स्ट ऑफ कॉन्फ्लिक्ट एंड डिजास्टर्स” पर आधारित व्याख्यान सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. राम सतीश पुसुपुलेटी तथा नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के डिप्टी कमांडेंट श्री पवन जोशी ने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय


विशेषज्ञों ने मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों पर मंडराते खतरों, उनके प्रकार, संरक्षण की चुनौतियों तथा आपदा प्रबंधन के प्रभावी उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि धरोहर संरक्षण में शासन के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में प्रदेश के प्रमुख मंदिरों—दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा, महामाया मंदिर रतनपुर, राजीवलोचन मंदिर राजिम, सहसपुर स्थित शिव एवं बजरंगबली मंदिर तथा लक्ष्मणेश्वर मंदिर खरौद के ट्रस्ट एवं समिति के पदाधिकारियों ने भी सहभागिता की।

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय


इस अवसर पर INTACH रायपुर चैप्टर के संयोजक श्री अरविंद, श्री ए.के. सिंह, श्री श्रीश मिश्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पी.सी. पारख, उप संचालक एवं विभागीय अधिकारियों—डॉ. अरुंधति परिहार, प्रवीन तिर्की, भीरेंद्र धीवर, विक्रांत वैष्णव, डॉ. राजीव मिंज, अमर भरतद्वाज, नूतन एक्का और अरुण निर्मलकर की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम का सफल संचालन पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह ने किया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि आधुनिक समय में आपदाओं और संकटों के बीच धरोहरों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

Share this post with:

AD R.O. No. - 13766/84

AD R.O. No. - 13404/21

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web