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** आलेख- संजय दुबे
नायिका और अभिनेत्री में क्या फर्क है? आम भाषा में दोनों में कोई अंतर नहीं दिखता है। नायिका हमेशा नायक की होती है।अभिनेत्री, अभिनय का सामर्थ्य रखती है याने अभिनेत्री होने के लिए अनुभव की अनिवार्यता होती है।
फिल्म को देखने वाले "दर्शक"को लैंगिक आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया जाता है पुरुष दर्शक और महिला दर्शक। दोनों वर्गों का लैंगिक आधार पर देखने का नजरिया अलग अलग होता है।
ये सर्वमान्य तथ्य है कि विपरीत लिंगों में प्राकृतिक आकर्षण होता है। इसे चुंबक के गुण के रूप में देखा जा सकता है।
पुरुष दर्शक केवल अभिनय ही नहीं देखता है बल्कि नारी के प्रति उसके शारीरिक आकर्षण की संतृप्ति को भी पूर्ण करता है।यही कारण है कि दुनियां भर के किसी भी हिस्से में फिल्म बने निर्माता निर्देशक इस बात का विशेष ख्याल रखते है कि उनकी फिल्म में एक आकर्षक नायिका होना चाहिए। इसके लिए नायिका केंद्र बिंदु में होती है।कहानी की मांग में यदि नायिका को संस्कार के दायरे में दिखाना मजबूरी हो तो सहनायिका या खल नायिका के माध्यम से मांग की पूर्ति की जाती है।
पुरुष दर्शक आमतौर पर स्वप्नलोक पर विचरने की आजादी लेता है।फिल्मों की नायिकाएं, उनके लिए नायिकाएं ही नहीं होती है बल्कि एक ऐसे अज्ञात संबंध की दूसरी धुरी होती है जिससे दर्शक दिल लगाता है, एक पक्षीय प्रेम करता है ,इससे भी आगे जाकर कल्पनालोक में विचरण करता है। जब से फिल्मे बन रही है और नायिकाओं का प्रवेश हुआ है(शुरुवाती दौर में पुरुष ही स्त्री रूप का श्रृंगार कर अभिनय किया करते थे)तब से नायिकाओं ने पुरुष दर्शको के दिल और दिमाग पर राज किया है।इस राजकाज के लिए नायिकाओं का अविवाहित होना प्रथम और अनिवार्य शर्त रहती है।इसका फायदा ये होता है कि अविवाहित युवा दर्शक से लेकर विवाहित पुरुष दर्शक अविवाहित नायिकाओं के लिए फिल्म देखने थियेटर आते है। मेरे हिसाब से अविवाहित नायिका के होने से दर्शक का स्वप्नलोक में विचरण आसान होता है। यही कारण है कि मधुबाला, नूतन,नर्गिस,वैजयंती माला,हेमा मालिनी,रेखा,माधुरी दीक्षित, श्री देवी, ऐश्वर्या राय सहित दीपिका पादुकोण जब तक अविवाहित रही उनके चाहने वाले पुरुष दर्शको का बहुत बड़ा वर्ग था।जैसे ही इनका विवाह हुआ दर्शकों ने इन्हें नायिका मानने के बजाय अभिनेत्री की केटेगरी में डाल दिया। इनकी फिल्म देखने वाले पुरुष दर्शको की संख्या में जबरदस्त कमी देखने को मिली।
इस महीने दक्षिण भाषी फिल्मों सहित हिंदी फिल्मों में बतौर नायिका के रूप में रश्मिका मदाना का विवाह दक्षिण के नायक विजय देवरकोंडा के साथ होने जा रहा है। रश्मिका ने पुष्पा, पुष्पा2, एनिमल, गर्ल फ्रेंड, छावां फिल्म के साथ हिंदी फिल्मों में शानदार एंट्री की थी। उनके नायिकात्व ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई थी। उनके विवाह के बाद पुरुष दर्शक नई नायिका की तलाश में जुटेगा ये तय है।
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