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जगदलपुर। नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे इस क्षेत्र में अब ग्रामीण विद्युतीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। बिजली विभाग के अनुसार संभाग के कुल 1189 गांवों में से लगभग 70 प्रतिशत गांवों में विद्युत आपूर्ति पहुंचा दी गई है, जबकि शेष 30 प्रतिशत दुर्गम और पहुंच विहीन क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा प्रणाली के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार 860 गांवों में पारंपरिक बिजली पहुंचाई जा चुकी है। वर्षभर के भीतर बस्तर संभाग के सभी गांवों को 100 प्रतिशत विद्युतिकरण के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है, खासकर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों में, जहां भौगोलिक कठिनाइयों और कभी-कभी सुरक्षा चुनौतियों के कारण कार्य अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है।
बिजली विभाग के एसी केबी मैथ्यू ने बताया कि बारिश के मौसम से पहले अधिकतम गांवों तक बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि बारिश शुरू होने के बाद नदी-नालों के उफान और दुर्गम रास्तों के कारण काम में बाधाएं आती हैं। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में लगातार बादल रहने या धूप की कमी के कारण सोलर पैनल की चार्जिंग भी प्रभावित होती है। उन्होने बताया कि नियद नेल्लनार योजना और धरती आबा योजनाओं का उद्देश्य अंतिम छोर तक खंभे लगाकर बिजली पहुंचाना है। जिससे ग्रामीणों को बारिश में बैटरी चार्ज की समस्या से छुटकारा मिल सके। ताकि कोई भी गांव बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित न रहे।
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