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दंतेवाड़ा। जिले के श्यामगिरी इलाके में 3 युवकों ने वन्यजीव बेंगाल मॉनिटर लिजार्ड जिसे स्थानीय ग्रामीणाें द्वारा इसे गोह कहा जाता है, को पकड़ लिया। आरोप है कि युवकों ने इसे पकाया और खा लिया। इस दौरान एक युवक ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग हरकत में आया और तीनों युवकों को आज गुरूवार काे पकड़ लिया गया है। रेंजर डॉ. रितेश पांडेय ने इसकी पुष्टि करते हुए उन्होंने बताया कि फिलहाल आरोपियों से पूछताछ के साथ जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद मामले की विस्तृत जानकारी दी जायेगी।
मिली जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर हुंगा ओयाम नाम की आईडी से वीडियो पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। वीडियो में 2 युवक मॉनिटर लिजार्ड को पकड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक कैमरे के सामने इसे शराब के साथ चखना बनाने की बात कहता नजर आ रहा है। इसके बाद वीडियो में मॉनिटर लिजार्ड को युवक चाकू से उसके पैर काटते हुए नजर आ रहे हैं। बाद में इसे पकाकर खाने की बात सामने आई है। वीडियो वायरल हुआ तो इसकी जानकारी वन विभाग तक पहुंचने के बाद टीम पीसीसीएफ के निर्देश पर बचेली रेंजर प्रीतेश पांडेय और उनकी टीम ने श्यामगिरी क्षेत्र के युवकाें की तलाश कर तीनों को वन विभाग की टीम अपने साथ लेकर आई है, मामले की जांच जारी है। बताया जा रहा है कि तीनों युवक बोर उत्खनन करने वाले वाहन में काम करते हैं। वन विभाग के अनुसार जिस मॉनिटर लिजार्ड का शिकार किया गया, उसकी उम्र करीब 3 से 4 महीने बताई जा रही है। इसके शिकार पर 3 से लेकर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। यही सजा टाइगर या अन्य वन्य जीव के शिकार पर भी मिलती है।
बेंगाल मॉनिटर लिजार्ड का वैज्ञानिक नाम वारानेस बेंगालेंसिस है। इसे भारत में आम तौर पर गोह, गोहेरा या मॉनिटर लिजार्ड के नाम से जाना जाता है। यह छिपकली प्रजाति का बड़ा सरीसृप है और भारत में व्यापक रूप से या जाता है। इसका शरीर मजबूत होता है, पूंछ लंबी और मांसल होती है। इसकी जीभ दो हिस्सों में बंटी होती है। यह मुख्य रूप से जमीन पर रहने वाला जीव है, और दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। इसके भोजन में कीड़े-मकोड़े, मेंढक, केकड़े, छोटे कृंतक, छिपकलियां और अन्य छोटे जीव शामिल होते हैं। बेंगाल मॉनिटर भारत के बड़े हिस्से में पाया जाता है, लेकिन यह छत्तीसगढ़ के बस्तर में दुर्लभ है। इसके अलावा इसकी मौजूदगी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और पश्चिम एवं दक्षिण एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी दर्ज की गई है। यह जंगलों के अलावा झाड़ियों वाले क्षेत्रों, खेतों, सूखे और नम इलाके कई तरह के प्राकृतिक आवासों में रह सकता है। बस्तर जैसे वन क्षेत्र इसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं, इसलिए यहां इसे देखे जाने की संभावना रहती है।
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