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वन विभााग ढोलकल श्रीगणेश तक पहुंचने चट्टान काटकर बना रहा सुगम रास्ता

18 Apr 2026   5 Views

वन विभााग ढोलकल श्रीगणेश तक पहुंचने चट्टान काटकर बना रहा सुगम रास्ता

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दंतेवाड़ा। जिले के बैलाडीला की पहाडिय़ों में विराजमान ढोलकल श्रीगणेश के दर्शन अब भक्तों के लिए आसान होने जा रहे हैं। यहां की पहाड़ी पर सीधी चढ़ाई हर किसी के लिए आसान नहीं होती। ऐसे में यहां चट्टानों को तराशकर 3 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थापित ढोलकल श्रीगणेश प्रतिमा तक ज्यादा सुगम रास्ता बनाया जा रहा है। पाथ-वे के साथ हट (झोपडिय़ां) और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएगी। जगह-जगह बैठने के इंतजाम भी किए जाएंगे। 
वन विभाग पहाडिय़ों के नीचे ढोलकल श्रीगणेश तक जाने वाले रास्ते में भव्य प्रवेश द्वार तैयार कर लिया है। यहां बैठने, समय बिताने और पीने के पानी का इंतजाम कर लिया गया है। आगे ठहरने के लिए कैंपिंग सुविधा देने की भी तैयारी है। इसके अलावा पहाड़ी के ऊपर ढोलकल श्रीगणेश तक जाने के लिए सुगम रास्ता तैयार करने चट्टानों को तराशने का काम भी जारी है। स्थानीय समिति की ओर से गाइड की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर अनुभव मिल सके। वन विभाग दंतेवाड़ा जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह पहल कर रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकें।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ट्रैकिंग सुबह 7:30 से दोपहर 2 बजे तक की जा सकेगी, वहीं शाम 5 बजे तक वापसी जरूरी है। ट्रैकिंग के दौरान संगीत नहीं बजाएं, यि प्रतिबंधित है । ट्रैकिंग के लिए गाइड साथ ले जाना अनिवार्य है। पॉलीथिन, प्लास्टिक लेकर न जाएं। बाहरी व्यंजन नहीं, बस्तरिहा व्यंजन उपलब्ध होगा। दंतेवाड़ा डीएफओ रंगनधा रामकर्षणा वाय का कहना है कि बैलाडिला पहाड़ी पर लगभग 3000 फीट ऊंचाई पर स्थित यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। यहां विराजमान भगवान श्रीगणेश की 3 फीट ऊंची पत्थर की प्रतिमा 10वीं-11वीं शताब्दी के नागा वंशिय काल की मानी जाती है, जो इस क्षेत्र का मुख्य आकर्षण है। ढोलकल को पर्यटन के रूप में विकसित करने का मुख्य उद्देश्य यहां अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

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