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जगदलपुर। नगर निगम जगदलपुर से जुड़ी एक निविदा प्रक्रिया के बीच स्पीड पोस्ट से भेजे गए दस्तावेज गंतव्य तक नही पंहुचने पर रायपुर स्थित राघव एडवरटाइजिंग ने इस संबंध में प्रधान डाकघर जगदलपुर के डाक अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा गया निविदा दस्तावेज निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंच पाया ।
शिकायत पत्र के अनुसार राघव एडवरटाइजिंग रायपुर द्वारा 6 मई 2026 को रायपुर एनएसएच से स्पीड पोस्ट आर्टिकल क्रमांक EC461174536IN के जरिए आयुक्त नगर पालिक निगम जगदलपुर को “मिनी स्मार्ट पीपीपी मॉडल के तहत स्थापना एवं संचालन हेतु रुचि की अभिव्यक्ति” से संबंधित निविदा दस्तावेज भेजे गए थे। दस्तावेजों के साथ 2 लाख रुपए की डिमांड ड्राफ्ट सहित अन्य जरूरी कागजात भी संलग्न थे। डाक विभाग की ऑनलाइन ट्रैकिंग रिपोर्ट में यह स्पीड पोस्ट 8 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर जगदलपुर डाकघर पहुंचना दर्शाया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में डाक सामग्री के जगदलपुर पहुंचने की जानकारी होने के बावजूद संबंधित कार्यालय तक उसकी डिलीवरी नहीं हुई। लगातार संपर्क और जानकारी जुटाने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उक्त स्पीड पोस्ट वर्तमान में डाकघर में उपलब्ध नहीं है। इसके बाद दस्तावेजों के गुम होने की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा है कि इसमें महत्वपूर्ण निविदा दस्तावेज और बड़ी राशि का डिमांड ड्राफ्ट शामिल था।
राघव एडवरटाइजिंग ने अपने आवेदन में आशंका जताई है कि स्पीड पोस्ट को जानबूझकर गायब या गुम किया गया हो सकता है, जिससे उनकी संस्था निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं ले सके। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि इस पूरे घटनाक्रम में विभागीय कर्मचारी, बाहरी व्यक्ति अथवा अन्य कोई संबंधित पक्ष शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले को गंभीर और आपराधिक प्रकृति का बताते हुए शिकायतकर्ता ने विस्तृत जांच की मांग उठाई है।
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग रायपुर, कलेक्टर जगदलपुर और आयुक्त नगर निगम जगदलपुर को भी भेजी गई है। आवेदन में डाक विभाग से आग्रह किया गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब यह मामला सामने आने के बाद डाक विभाग की कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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