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00 खामोशी की दुनिया में लौटे जिंदगी के सुर
राजनांदगांव। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं मुख्यमंत्री चिरायु योजना ने एक मासूम बच्चे के जीवन में फिर से सुनने की खुशियां लौटाई हैं। राजनांदगांव जिले के मयंक ने करीब डेढ़ वर्ष की उम्र में अपनी सुनने की क्षमता खो दी थी। परिवार के लिए यह स्थिति बेहद कठिन थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और शासकीय योजनाओं के प्रभावी समन्वय से मयंक को उपचार की नई उम्मीद मिली। आरबीएसके टीम ने बच्चे की स्थिति का परीक्षण करने के बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की और परिवार से समन्वय करते हुए बिना समय गंवाए मयंक को देश की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था एम्स में उपचार के लिए रिफर किया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मयंक का कोक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
ऑपरेशन के बाद वह भावुक क्षण आया, जिसका इंतजार मयंक के माता-पिता लंबे समय से कर रहे थे। जब पहली बार कोक्लियर इम्प्लांट मशीन को चालू किया गया, तो मयंक ने अपने माता-पिता की आवाज पहली बार सुनी। अपने बच्चे के चेहरे पर सुनने की प्रतिक्रिया देखकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। यह भावुक पल मुख्यमंत्री चिरायु योजना की सफलता और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता की जीवंत मिसाल बन गया।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑपरेशन के बाद मयंक के स्वास्थ्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उसे आगे के उपचार एवं पुनर्वास के लिए सीआरसी (क्षेत्रीय पुनर्वास केन्द्र) भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में मयंक को स्पीच एवं हियरिंग थेरेपी दी जा रही है, ताकि वह आवाजों को बेहतर ढंग से समझ सके और सामान्य बच्चों की तरह बोलना सीख सके। मयंक की कहानी यह बताती है कि समय पर पहचान, उचित मार्गदर्शन और शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किसी बच्चे के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और मुख्यमंत्री चिरायु योजना के माध्यम से मिला उपचार मयंक के लिए केवल चिकित्सा सुविधा नहीं, बल्कि उसकी खामोश दुनिया में जिंदगी के सुरों की नई शुरूआत है।
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