CNIN News Network

रसायन मुक्त खेती से अनिमा खेस्स ने रची नई इबारत, बनीं अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

11 Mar 2026   30 Views

रसायन मुक्त खेती से अनिमा खेस्स ने रची नई इबारत, बनीं अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

Share this post with:

00 नीम तेल और स्थानीय जड़ी-बूटियों से तैयार कर रही है जैविक कीटनाशक
सरगुजा। जिले के सीतापुर ब्लॉक के ग्राम धर्मपुर की एक प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती अनिमा खेस्स ने आधुनिक खेती की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव पेश किया है। पिछले तीन वर्षों से रासायनिक खेती को अलविदा कह कर जैविक खेती अपनाते हुए अनिमा न केवल शुद्ध अनाज उपजा रही हैं, बल्कि लागत में कमी लाकर अपनी आय भी बढ़ा रही हैं।
प्रशिक्षण से मिली नई राह
अनिमा बताती हैं कि पहले वे पारंपरिक रूप से रासायनिक खादों का प्रयोग करती थीं, जिससे खेती की लागत अधिक आती थी और मिट्टी की सेहत भी बिगड़ रही थी। उन्होंने कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। सतत सीखने की ललक ने उन्हें जैविक खेती के गुर सिखाए, जिसे अब वे अपने जीवन का मुख्य आधार बना चुकी हैं।

 रसायन मुक्त खेती से अनिमा खेस्स ने रची नई इबारत, बनीं अन्य किसानों के लिए प्रेरणा


खेत ही बन गई खाद की फैक्ट्री
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनिमा ने बाजार पर निर्भरता पूरी तरह खत्म कर दी है। वे अपने घर और बाड़ी में ही जैविक खाद और कीटनाशक तैयार कर रही हैं। केंचुआ टैंक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट खाद का निर्माण कर रही हैं, स्वदेशी तकनीक में कंडा पानी, नाडेप और पंचपत्ती घोल, नीम तेल और स्थानीय जड़ी-बूटियों से तैयार घोल जैविक कीटनाशक बना रहीं हैं,जो फसलों को सुरक्षित रखते हैं।
स्वास्थ्य और बचत का दोहरा लाभ
अनिमा खेश का मानना है कि जैविक खेती के दोतरफा फायदे हैं। एक ओर जहाँ रासायनिक खादों और महंगे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च शून्य हो गया है, वहीं दूसरी ओर परिवार और समाज को जहर मुक्त, पौष्टिक आहार मिल रहा है। वे कहती हैं, जैविक खेती न केवल हमारी जेब बचाती है, बल्कि हमारे शरीर और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती है।
समूह के माध्यम से महिलाओं को किया जागरूक
एक सजग किसान होने के नाते अनिमा अब अपने स्व-सहायता समूह की अन्य दीदियों को भी जैविक खेती के महत्व और उद्देश्यों के बारे में जागरूक कर रही हैं। वे प्रशिक्षण के माध्यम से सीखी बातों को अन्य महिलाओं तक पहुँचाकर उन्हें भी प्राकृतिक खेती से जुडऩे के लिए प्रेरित कर रही हैं।

Share this post with:

AD R.O. No. - 13766/84

AD R.O. No. - 13404/21

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web