CNIN News Network

रविवार से शुरु होगा पितृ पक्ष, चतुर्थी और पांचमी एक ही दिन, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या

25 Sep 2026   11 Views

रविवार से शुरु होगा पितृ पक्ष, चतुर्थी और पांचमी एक ही दिन, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या

Share this post with:


रायपुर। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दौरान लोग दिवंगत पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पितरों का तर्पण करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर रविवार से होगी, चतुर्थी और पांचमी एक ही दिन 30 सितंबर को और 10 अक्टूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी।
पितृ पक्ष में श्रद्धालु सुबह स्नान कर तिल और जल से पितरों का तर्पण करते हैं। जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि को उनका श्राद्ध करने की परंपरा है। इसमें माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, भाई और अन्य दिवंगत परिजनों का स्मरण किया जाता है। पिंडदान के बाद ब्राह्मणों, परिवार और इष्ट-मित्रों को भोजन कराने तथा दान-पुण्य की भी परंपरा है। 26 सितंबर, शनिवार- पूर्णिमा: पूर्णिमा तिथि में दिवंगत हुए लोगों का श्राद्ध। 27 सितंबर, रविवार- प्रतिपदा: नाना-नानी के श्राद्ध के लिए यह तिथि विशेष मानी जाती है, यदि उनके घर में कोई और न हो। 30 सितंबर, बुधवार- चतुर्थी-पंचमी: परिवार में अविवाहित अवस्था में दिवंगत हुए लोगों का तर्पण। 3 अक्टूबर, शनिवार- अष्टमी: उसी वर्ष दिवंगत हुए पूर्वजों के पिंडदान की परंपरा। 4 अक्टूबर, रविवार- मातृ नवमी: माता और परिवार की अन्य महिलाओं के श्राद्ध के लिए विशेष दिन। 9 अक्टूबर, शुक्रवार- चतुर्दशी: दुर्घटना, जहर या आग से अकाल मृत्यु पाने वालों का श्राद्ध। 10 अक्टूबर, शनिवार- सर्वपितृ अमावस्या: जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं है, उनके निमित्त श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है।

Share this post with:

AD R.O. No. - 13997/18

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web