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0-महिला अधिकारों के विरोधियों को देश कभी माफ नहीं करेगा
0-नारी शक्ति वंदन अधिनियम के त्वरित कार्यान्वयन और 2026 के परिसीमन विधेयक पर सरकार का पक्ष रखा
नई दिल्ली। संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। 16 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह सत्र देश की लोकतांत्रिक यात्रा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने संबोधन में मुख्य रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के त्वरित कार्यान्वयन और 2026 के परिसीमन विधेयक पर सरकार का पक्ष रखा। बिलों पर चर्चा के लिए 16 और 17 अप्रैल को 15 घंटे का समय तय किया गया है। कल शाम 4 बजे वोटिंग की जाएगी। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है।
**लोकसभा में पीएम मोदी के संबोधन के मुख्य अंश...**
**विपक्ष के पुराने विरोध पर प्रहार-प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण बिल का पहले विपक्ष ने कड़ा विरोध किया था, जिसके कारण इसे लागू करने में देरी हुई।
**ऐतिहासिक अवसर-पीएम मोदी ने सदन के सदस्यों से आग्रह किया कि यह काम 25-30 साल पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन अब जब हमें इस नए आयाम को जोडऩे का अवसर मिला है, तो सभी साथियों को इसे हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।
**नीति निर्धारण में भागीदारी- उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की महिलाओं को अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र के नीति निर्धारण का सक्रिय हिस्सा बनना चाहिए।
**बारीकियों पर स्पष्टीकरण-पीएम मोदी ने आश्वस्त किया कि चर्चा के दौरान सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और बारीकियों पर सरकार सदन को विस्तृत और सटीक जानकारी प्रदान करेगी।
**देश की दशा और दिशा-प्रधानमंत्री ने इन विधेयकों को देश की दशा और दिशा तय करने वाला बताया, जो विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करेंगे।
**वैश्विक स्वीकृति-उन्होंने उल्लेख किया कि आज पूरे विश्व में भारत की स्वीकृति बढ़ी है और ऐसे सुधार हमारे लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाएंगे।
**सबका साथ-सबका विकास- विकसित भारत के निर्माण के लिए उन्होंने सबका साथ-सबका विकासके मंत्र को दोहराते हुए महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कही।
**विरोधियों को चेतावनी-उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि महिला अधिकारों के विरोधियों को देश कभी माफ नहीं करेगा।
सरकार ने इस सत्र में तीन प्रमुख विधेयक - संविधान (131वां) संशोधन, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पेश किए हैं। पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य न केवल महिलाओं को 33 प्रश आरक्षण देना है, बल्कि देश की नई राजनीतिक संरचना को मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 अप्रैल को साझा किए गए ड्राफ्ट बिलों के माध्यम से सरकार देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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