CNIN News Network

मोबाइल, कम्प्यूटर के अत्यधिक उपयोग से दृष्टि कमजोर होने की संभावना - डॉ. मिश्र

11 Sep 2026   6 Views

मोबाइल, कम्प्यूटर के अत्यधिक उपयोग से दृष्टि कमजोर होने की संभावना - डॉ. मिश्र

Share this post with:


00 नेत्र दान, महादान: सरस्वती शिशु मंदिर में व्याख्यान
रायपुर। वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने राष्ट्रीय नेत्र दान पखवाड़ा के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर मठपुरैना में आयोजित व्याख्यान में कहा हमारी आंखें प्रकृति का अनमोल उपहार हैं। इनके माध्यम से हम अपने आसपास की दुनिया को देखते, सीखते और जीवन का आनंद लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दृष्टि हानि के अधिकांश कारणों की समय पर जांच, उचित उपचार तथा जागरूकता से रोकथाम की जा सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को आंखों की देखभाल और नियमित नेत्र परीक्षण के महत्व को समझना चाहिए।एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती है 
डॉ दिनेश मिश्र ने दृष्टि हीनता के कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कुछ बच्चों में जन्म से ही आंखों की विकृतियां (जन्मजात दोष) पाई जाती हैं। यदि जन्म के बाद समय पर नेत्र परीक्षण कराया जाए तो इनमें से कई समस्याओं का सफल उपचार संभव है। विटामिन ए की कमी बच्चों में रतौंधी तथा कॉर्निया को गंभीर क्षति पहुंचा सकती है। हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता, आम, दूध और अंडे जैसे पौष्टिक आहार इसके अच्छे स्रोत हैं। बैक्टीरियल, वायरल तथा फंगल संक्रमण भी आंखों में लालिमा, दर्द, पानी आना और दृष्टि कम होने का कारण बन सकते हैं। संक्रमण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
डॉ मिश्र ने कहा दृष्टि दोष (निकट दृष्टि, दूर दृष्टि और एस्टिग्मैटिज्म) आज बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। नियमित नेत्र परीक्षण कराकर सही नंबर का चश्मा पहनना आवश्यक है। मोतियाबिंद बढ़ती उम्र में अंधत्व का सबसे सामान्य कारण है, लेकिन आधुनिक शल्य चिकित्सा द्वारा इसका सफल उपचार संभव है। कांचबिंदु (ग्लूकोमा) एक गंभीर रोग है जो बिना किसी प्रारंभिक लक्षण के धीरे-धीरे आंख की रोशनी नष्ट कर देता है। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित नेत्र जांच अत्यंत आवश्यक है।
डॉ मिश्र ने बताया डायबिटीज और उच्च रक्तचाप का प्रभाव आंख के पर्दे (रेटिना) पर पड़ता है। समय पर जांच और उपचार न मिलने पर स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है। पर्दा उखडऩा (रेटिनल डिटैचमेंट) एक आपातकालीन स्थिति है, जिसमें अचानक चमक दिखाई देना, काले धब्बे उड़ते हुए दिखना या दृष्टि पर पर्दा गिरने जैसा अनुभव हो सकता है।
डॉ मिश्र ने कहा आंखों की चोटें बच्चों में खिलौनों, पेंसिल, तीर-कमान तथा अन्य नुकीली वस्तुओं से हो सकती हैं। वयस्कों में सड़क दुर्घटनाओं, फैक्ट्री में काम करते समय, वेल्डिंग, एसिड, चूना और अन्य रसायनों के कारण आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। दीपावली के दौरान पटाखे, बम और रॉकेट तथा होली में गुलाल और रंगों से आंखों की सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करना चाहिए। रसायन आंख में चले जाने पर तुरंत साफ पानी से आंख धोकर अस्पताल पहुंचना चाहिए।
डॉ मिश्र ने वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के बेतहाशा उपयोग पर कहा आज मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग एक नई चुनौती बन गया है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन (ड्राई आई), जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना तथा कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचने के लिए 20-20-20 नियम अपनाएं—हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें, बार-बार पलकें झपकाएं, उचित रोशनी में काम करें तथा स्क्रीन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें।
डॉ मिश्र ने नेत्र दान पर चर्चा करते हुए कहा मृत्यु के बाद नेत्रदान करके दो कॉर्नियल अंध व्यक्तियों को नई रोशनी दी जा सकती है। नेत्रदान एक महान मानव सेवा है, जिसके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
नियमित नेत्र परीक्षण, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्वच्छता, सुरक्षात्मक उपाय, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का नियंत्रण तथा समय पर उपचार अपनाकर अधिकांश नेत्र रोगों से बचाव किया जा सकता है। स्वस्थ आंखें ही स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन की आधारशिला हैं। कार्यक्रम को संस्था के सचिव देवेंद्र अग्रवाल ने भी संबोधित किया।

Share this post with:

AD R.O. No. - 13997/18

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web