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बीजापुर। जिले की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों से जुड़ी जिले की 10 महिलाओं को चिरौंजी (चार) के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से राजनांदगांव एवं सालेकसा का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। वन संपदा से समृद्ध बीजापुर जिले में चिरौंजी सहित विभिन्न लघु वनोपज ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन वनोपजों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इस पहल के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को केवल कच्ची वनोपज के संग्रहण एवं विक्रय तक सीमित न रहकर उसके प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और विपणन से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है।
कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियों से जोडऩा तथा चिरौंजी प्रसंस्करण के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि के अवसर विकसित करना है। नम्रता चौबे ने बताया कि शैक्षणिक भ्रमण के दौरान महिला समूह की दीदियों ने चिरौंजी के प्रसंस्करण से लेकर अंतिम उत्पाद तैयार करने तक की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्हें चिरौंजी की सफाई, छंटाई, प्रसंस्करण, गुणवत्ता प्रबंधन, पैकेजिंग एवं विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की तकनीकों से अवगत कराया गया। महिलाओं ने चिरौंजी के कच्चे उत्पाद को प्रसंस्कृत कर बाजार में बिक्री योग्य बनाने की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझा। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने, आकर्षक पैकेजिंग एवं बेहतर विपणन के माध्यम से अधिक आय अर्जित करने की संभावनाओं के बारे में व जानकारी प्राप्त की।
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