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भिलाई। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं विभाग द्वारा पद्मश्री स्वर्गीय डॉ. बशीर बद्र की स्मृति में महात्मा गांधी कला मंदिर में एक शाम बशीर बद्र के नाम गज़ल संध्या आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार थे व विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यपालक निदेशक (रावघाट) श्री अरुण कुमार उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सेल के भूतपूर्व निदेशक (कार्मिक) श्री गणतंत्र ओझा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अधिकारी संघ के अध्यक्ष श्री नरेंद्र बंछोर तथा उप महाप्रबंधक (क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं) एवं ओलंपियन श्री राजेंद्र प्रसाद सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं संगीत प्रेमियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। $गज़ल संध्या का शुभारंभ युवा $गज़ल गायक श्री परन राज भाटिया की प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने डॉ. बशीर बद्र की चर्चित $गज़लों को अपनी मधुर एवं प्रभावशाली आवाज़ में प्रस्तुत किया। इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय भजन एवं $गज़ल गायक श्री प्रभंजय चतुर्वेदी ने अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने डॉ. बशीर बद्र की प्रसिद्ध $गज़ल कभी यूँ भी आ मेरी आँख में सहित अनेक लोकप्रिय रचनाओं को प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत कालजयी $गज़लों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया तथा संपूर्ण सभागार साहित्य एवं संगीत के सुरम्य वातावरण से गुंजायमान रहा। कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति सुप्रसिद्ध $गज़ल गायिका डॉ. साधना रहाटगांवकर द्वारा दी गई। उन्होंने अपनी विशिष्ट गायन शैली में डॉ. बशीर बद्र की अनेक कालजयी $गज़लों को प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री पवन कुमार ने डॉ. बशीर बद्र की लोकप्रिय $गज़ल यूँ ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर में रहा करो; ये $गज़ल की सच्ची किताब है, इसे चुपके-चुपके पढ़ा करो को अपने सहज एवं प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने अत्यंत सराहा।संगीतमय संध्या को सफल बनाने में खैरागढ़ एवं भिलाई के ख्यातिप्राप्त संगतकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। तबले पर श्री अवध सिंह ठाकुर, सारंगी पर श्री शफीक हुसैन, बांसुरी पर श्री बिहारी तारम, तबले पर श्री भालचंद्र शेगेकर एवं श्री रामचंद्र सर्पे तथा की-बोर्ड पर श्री साई चक्रवर्ती ने उत्कृष्ट संगत प्रदान की।
कार्यक्रम का संचालन श्री सुप्रियो सेन द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री पी. टी. उल्लास कुमार, श्री दुष्यंत हरमुख, श्री दीपेन हलदार, श्री रवीन्द्र कर्मकार, श्री संदीप बोकीलवार, श्री रवीश कालगांवकर, श्रीमती स्वाति देशपांडे सहित बड़ी संख्या में कला, साहित्य एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।स्वर्गीय डॉ. बशीर बद्र की स्मृति को समर्पित यह आयोजन उनकी रचनाधर्मिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ भिलाई की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ।
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