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महतारी वंदन से माधुरी के हुनर को मिला संबल, दीपावली के लिए गढ़ रहीं मिट्टी के दीये

26 Oct 2026   15 Views

महतारी वंदन से माधुरी के हुनर को मिला संबल, दीपावली के लिए गढ़ रहीं मिट्टी के दीये

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00 हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से छोटी जरूरतें पूरी करने में मिल रही मदद
रायपुर। त्योहारों की रौनक तब और बढ़ जाती है, जब मेहनत के साथ आत्मनिर्भरता का भरोसा भी जुड़ जाए। बलौदाबाजार नगर के वार्ड क्रमांक 18 की श्रीमती माधुरी पाडे के लिए इस दीपावली का उत्साह कुछ ऐसा ही है। वह अपने हाथों से मिट्टी के दीये बना रही हैं। कुम्हारी का पारंपरिक हुनर उनके परिवार की आजीविका का हिस्सा है और महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में सहारा बन रही है। 
श्रीमती माधुरी पाडे, पति श्री हरिकिशन पाडे के साथ विवाह के बाद से ही कुम्हारी के काम में सहयोग कर रही हैं। मिट्टी को आकार देकर उपयोगी और पारंपरिक वस्तुएं बनाना उनके परिवार का पुराना काम है। पहले अपनी छोटी जरूरतों के लिए उन्हें पति पर निर्भर रहना पड़ता था। अपनी आवश्यकताएं स्वयं पूरी करने की इच्छा थी, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण यह आसान नहीं था।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से उन्हें आर्थिक संबल मिला है। अब वह अपनी आवश्यकताओं के लिए इस राशि का उपयोग कर पाती हैं। उनके लिए यह सहायता केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने छोटे-छोटे फैसले स्वयं लेने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का माध्यम भी है।
मिट्टी के दीयों में मेहनत और परंपरा की चमक
दीपावली नजदीक आने के साथ श्रीमती माधुरी पाडे मिट्टी के दीये तैयार करने में जुटी हैं। मिट्टी को आकार देकर दीये बनाते समय उनके मन में त्योहार की खुशियों के साथ अपनी कला को आगे बढ़ाने का उत्साह भी है। इससे पहले वह पोरा पर्व के लिए मिट्टी के जाता और बैल बना चुकी हैं। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़ी इन वस्तुओं के जरिए वह अपने पारिवारिक हुनर को सहेज रही हैं। श्रीमती माधुरी बताती हैं कि योजना से मिलने वाली नियमित सहायता के कारण त्योहारों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए खर्च करना पहले से आसान हुआ है। अब वह तीज-त्योहार अधिक खुशी और संतोष के साथ मना पाती हैं। मिट्टी के दीयों को गढ़ते उनके हाथों में मेहनत, परंपरा और आत्मनिर्भरता—तीनों की झलक दिखाई देती है।
योजना से मिले लाभ के बारे में वह कहती हैं, “पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी पति पर निर्भर रहना पड़ता था। जब से महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपये मिलने लगे हैं, तब से मैं अपनी जरूरतें खुद पूरी कर पा रही हूं। अब तीज-त्योहार भी खुशी से मना पाते हैं। दीपावली के लिए दीये बना रही हूं। इसके लिए विष्णु भैया का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

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