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सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में कुपोषण उन्मूलन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और महिला कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति का विस्तृत परीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी गंभीर कुपोषित बच्चा उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए तथा महतारी वंदन योजना के लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिले के सभी परियोजना अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान कलेक्टर ने गंभीर कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे होम विजिट, बच्चों के नियमित वजन मापन, स्वास्थ्य परीक्षण और पोषण गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कुपोषित बच्चों की सतत मॉनिटरिंग करते हुए उन्हें शीघ्र सामान्य श्रेणी में लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। बैठक में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने लंबित प्रकरणों और भुगतान की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ बिना विलंब मिलना चाहिए।
महतारी वंदन योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिले में 1223 हितग्राहियों की राशि विभिन्न कारणों से लंबित है। इस पर कलेक्टर ने सभी परियोजना अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-केवाईसी की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि तकनीकी या दस्तावेज संबंधी कारणों से कोई भी हितग्राही योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपलब्ध बेड और भर्ती बच्चों की संख्या पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल एनआरसी में भर्ती कराया जाए। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का पूर्ण उपयोग होना चाहिए और उपचार व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने सखी वन स्टॉप सेंटर की गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने सेंटर में प्राप्त प्रकरणों, उनके निराकरण, पीडि़त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा भोजन, आवास और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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