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00 वन अधिकार पट्टाधारी कृषकों को मिल रही प्रदूषण-रहित, निःशुल्क और बारहमासी बिजली
00 पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर साग-सब्जियों और नकदी फसलों के उत्पादन से बदल रही है किसानों की तकदीर
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सौर सुजला योजना नारायणपुर और बस्तर जैसे वनांचल क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना से किसानों को बिना बिजली बिल और पावर कट की चिंता के रियायती दरों पर सोलर पंप मिल रहे हैं, जिससे वे बंजर टिकरा भूमि पर भी साल में दो से तीन फसलें ले रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और दुर्गम इलाकों में जहाँ बिजली का पहुँचना कभी एक दूर का सपना हुआ करता था, वहाँ अब ‘सौर सुजला योजना’ उम्मीदों का नया सवेरा लेकर आई है। नारायणपुर जिले के वनांचल एवं विद्युतविहीन क्षेत्रों में क्रेडा विभाग द्वारा संचालित इस योजना ने वन अधिकार पट्टाधारी किसानों की ज़िंदगी में ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।
बिजली बिल और कटौती की झंझट से आज़ादी: खेतों तक पहुँची बारहमासी सिंचाई
जिले की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को मात देते हुए राज्य शासन ने यहाँ के किसानों को रियायती दरों पर 2 एच.पी., 3 एच.पी. और 5 एच.पी. क्षमता के सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई पंप उपलब्ध कराए हैं। प्रदूषण-रहित और पूरी तरह मुफ्त सौर ऊर्जा मिलने से किसानों को अब न तो बिजली कटौती का रोना रोना पड़ता है और न ही भारी-भरकम बिजली बिल का डर सताता है।

सिर्फ धान ही नहीं, अब हरी-भरी सब्जियों से लहलहा रहे हैं खेत
सोलर पंप लगने से पहले यहाँ के किसान केवल मानसून और पारंपरिक धान की खेती पर ही आश्रित हुआ करते थे। लेकिन अब खेतों तक बारहमासी पानी की उपलब्धता ने पूरा परिदृश्य बदल कर रख दिया है। आज किसान धान के साथ-साथ व्यापारी स्तर पर साग-सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही विविध नकदी फसलें (Cash Crops) उगा रहे हैं, और सालभर में एक से अधिक फसलें लेकर अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
नौ साल 4,722 उम्मीदें: जिले के सिंचित क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार
क्रेडा विभाग के अथक प्रयासों का परिणाम है कि नारायणपुर जिले में पिछले 9 वर्षों के भीतर 4,722 से अधिक किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा चुके हैं। इस योजना के धरातल पर उतरने से न सिर्फ जिले के सिंचित रकबे में बड़ा विस्तार हुआ है, बल्कि स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई और मजबूत गति मिली है।

आजीविका का नया संबल और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
निःसंदेह ‘सौर सुजला योजना’ केवल सिंचाई का एक साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह वनांचल के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का अचूक माध्यम बन चुकी है। खेतों में लहलहाती हरी फसलें और अन्नदाताओं के चेहरों पर चमकती मुस्कान इस बात की गवाह है कि सौर ऊर्जा ने छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों में खुशहाली की एक नई इबारत लिख दी है।
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