Share this post with:
00 जल संरक्षण से कृषि विकास को मिली नई दिशा, दोहरी फसल और बढ़ी आय की उम्मीद
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और कृषि सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।बलरामपुर जिले के ग्राम सुलसुली में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित चेकडेम किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस पहल से अब किसानों की खेती केवल वर्षा पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें सालभर सिंचाई सुविधा मिलने से दोहरी फसल उत्पादन का अवसर प्राप्त होगा।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत सुलसुली के लेदो नाला पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 17 लाख रुपये की लागत से चेकडेम का निर्माण कराया गया है। यह संरचना क्षेत्र में जल संरक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पहले गांव के किसानों को सिंचाई संसाधनों के अभाव में मुख्यतः वर्षा आधारित खेती करनी पड़ती थी। खरीफ सीजन के बाद पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकांश कृषि भूमि रबी मौसम में खाली रह जाती थी। चेकडेम निर्माण के बाद अब लगभग 10 किसानों की 15 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में खेती संभव हो सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार चेकडेम से जल संचयन बढ़ने के साथ भू-जल स्तर में भी सुधार होगा। इससे आसपास के कुओं और अन्य जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसका लाभ किसानों और ग्रामीणों को लंबे समय तक मिलेगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसान पारंपरिक फसलों के साथ सब्जी, दलहन एवं अन्य नकदी फसलों की खेती कर सकेंगे, जिससे फसल विविधीकरण और आय वृद्धि के नए अवसर सृजित होंगे।
यह चेकडेम ग्रामीणों के दैनिक जीवन में भी उपयोगी सिद्ध होगा। संरक्षित जल का उपयोग घरेलू जरूरतों, पशुओं के पेयजल तथा अन्य निस्तारी कार्यों में किया जा सकेगा, जिससे गांव में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम होगी।
Share this post with:
13 Jun 2026 7 Views
13 Jun 2026 8 Views
12 Jun 2026 22 Views
12 Jun 2026 10 Views
11 Jun 2026 25 Views