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बीजापुर में मिला 3.65 अरब साल पुराना पत्थर, भारत की अब तक की सबसे पुरानी चट्टान बनी

05 Sep 2026   12 Views

बीजापुर में मिला 3.65 अरब साल पुराना पत्थर, भारत की अब तक की सबसे पुरानी चट्टान बनी

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बीजापुर। बीजापुर जिले के दक्षिण-पश्चिम में भोपालपट्टनम के जंगल की जमीन के नीचे मिली एक चट्टान को वैज्ञानिकों ने करीब 3.65 अरब वर्ष पुराना बताया है। यह खोज भारतीय भूभाग पर अब तक पहचाने गए सबसे पुराने चट्टानी अवशेष के रूप में सामने आई है। चट्टान उस दौर की है, जब पृथ्वी अपनी शुरुआती पर्पटी के निर्माण के चरण में थी। इस खोज से भारत के भूवैज्ञानिक इतिहास का रिकॉर्ड करीब 15 करोड़ वर्ष और पीछे चला गया है। इससे पहले झारखंड का सिंहभूम भारत के सबसे प्राचीन चट्टानी क्षेत्र के तौर पर लंबे समय से शीर्ष पर था। बस्तर में इससे पहले किए गए अध्ययनों में करीब 3.56 अरब वर्ष पुरानी चट्टानों की मौजूदगी सामने आई थी। नई खोज ने इस रिकॉर्ड को लगभग 150 मिलियन वर्ष पीछे कर दिया है। शोधकर्ताओं के अनुसार बस्तर की 3.64 से 3.60 अरब वर्ष पुरानी चट्टानें दुनिया में ज्ञात सबसे पुराने मैग्मैटिक चार्नोकाइट्स में शामिल हो सकती हैं। यह खोज शुरुआती पृथ्वी के भूवैज्ञानिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह खोज बिजापुर-भोपालपट्टनम कॉरिडोर के आस-पास हुई है। यह क्षेत्र बस्तर क्रेटन का हिस्सा है। क्रेटन महाद्वीपीय भू-पर्पटी का ऐसा प्राचीन हिस्सा होता है, जो करोड़ों वर्षों में टकराव, दबाव, दफन होने और पिघलने जैसी प्रक्रियाओं के बावजूद अस्तित्व में बना रहता है।
यह अध्ययन 'इओआर्कियन सबडक्शन पर पेट्रोक्रोनोलॉजिकल सीमाएँ: भारत के दक्षिण-पश्चिम बस्तर क्रेटन से प्रमाणÓ शीर्षक से किया गया है। शोध में आईआईएसईआर भोपालके प्रो. प्रीतम नसीपुरी और कौशिक सतपथी के साथ कोरिया बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट के प्रो. कीवूक यी तथा पूर्व आईआईटी खडग़पुरप्रोफेसर अभिजीत भट्टाचार्य शामिल रहे। उक्त शोधकर्ताओं के अनुसार क्षेत्र में करीब 3.65 अरब वर्ष पहले एक प्रमुख भूवैज्ञानिक घटना हुई। इसके बाद 3.64 से 3.60 अरब वर्ष के बीच एक और चरण आया, जबकि 3.44 से 3.40 अरब वर्ष पहले चट्टानों के दोबारा सक्रिय या पुनर्गठित होने के प्रमाण मिले। अध्ययन में दो अलग प्रकार की चट्टानों की पहचान की गई है। इनमें सबसे पुरानी द्दठ्ठद्गद्बह्यह्य है, जो धारियों वाली चट्टान होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके स्वरूप में पृथ्वी के शुरुआती इतिहास में हुए जटिल बदलाव दर्ज हैं।
प्रो. प्रीतम नसीपुरी के अनुसार चट्टान गहराई में बनी, जहां इसे गर्म होने, आंशिक रूप से पिघलने और दोबारा बनने जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। यह प्रक्रिया सतह से करीब 30 से 50 किलोमीटर नीचे और संभवत: 1,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर हुई होगी। रासायनिक और समस्थानिक साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि 3.6 अरब वर्ष से भी पहले पृथ्वी पर सबडक्शन से जुड़ी प्रक्रियाएं सक्रिय हो सकती थीं। ये प्रक्रियाएं आधुनिक प्लेट टेक्टोनिक्स की शुरुआती पूर्वज मानी जा सकती हैं।

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