CNIN News Network

बस्तर संभााग में 28 हजार मीट्रिक टन धान की कमी, 89 करोड़ की वसूली होगी समिति प्रबंधकों से

09 Sep 2026   7 Views

बस्तर संभााग में 28 हजार मीट्रिक टन धान की कमी, 89 करोड़ की वसूली होगी समिति प्रबंधकों से

Share this post with:


जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में समर्थन मूल्य पर हुई धान खरीदी के बाद बड़ा शॉर्टेज सामने आया है। वर्ष 2025-26 में बस्तर संभाग के 7 जिलों के 382 धान खरीदी केंद्रों में हुई खरीदी के भौतिक सत्यापन के दौरान कांकेर से 13,281 मीट्रिक टन, कोंडागांव से 6,642 मीट्रिक टन, बस्तर से 4,687 मीट्रिक टन, बीजापुर से 2,131 मीट्रिक टन, सुकमा से 1,501 मीट्रिक टन सहित कुल 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान कम पाया गया है। इस धान की कीमत लगभग 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपये आंकी गई है। अब जिला सहकारी बैंक ने संबंधित समितियों के प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों से शॉर्टेज की राशि की भरपाई कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जगदलपुर जिला सहकारी बैंक के अतिरिक्त प्रबंधक एस. रजा के मुताबिक बस्तर संभाग के 7 जिलों में धान बेचने के लिए 2 लाख 72 हजार 647 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 2 लाख 28 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा। पूरे संभाग में कुल 13 लाख 74 हजार 383 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। खरीदी के बाद मिलर्स द्वारा 13 लाख 46 हजार 138 मीट्रिक टन धान का उठाव किया गया। इसके बाद सभी खरीदी केंद्रों का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें करीब 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान का शॉर्टेज सामने आया। 
अधिकारियों के अनुसार शॉर्टेज की राशि की वसूली के लिए संबंधित समितियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। समिति प्रबंधकों को राशि जमा करने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीदी प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि शॉर्टेज की भरपाई समिति प्रबंधकों से की जाएगी। वहीं, मारफेड से मिलने वाले कमीशन से भी इसकी भरपाई की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
कार्रवाई की तलवार लटकने के बाद समिति प्रबंधकों ने भी अपनी तरफ से कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में निर्धारित समय पर मारफेड द्वारा धान का उठाव नहीं किए जाने के कारण खरीदी केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़ा रहा। ऐसे में शॉर्टेज का पूरा खामियाजा समिति प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों पर डालना उचित नहीं है। समिति प्रबंधकों का कहना है कि जिस तरह धान संग्रहण केंद्रों और मिलर्स को शॉर्टेज के मामले में सरकार की ओर से निर्धारित छूट या सुखत का प्रावधान दिया जाता है, उसी तरह समितियों को भी राहत मिलनी चाहिए। उनका सवाल है कि यदि वेयर हाउस में चांवल के शॉर्टेज पर सुखत का प्रावधान है तो धान खरीदी के दौरान ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है? समिति प्रबंधकों का आरोप है कि समय पर धान का उठाव नहीं होने और संग्रहण केंद्रों में धान के खराब होने की स्थिति का असर अब खरीदी समितियों पर डाला जा रहा है।

Share this post with:

AD R.O. No. - 13997/18

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web