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जगदलपुर। बस्तर जिले के शहरी-ग्रामीण इलाकों में इन दिनों पीलिया के मरीज बड़ी संख्या में मिल रहे हैं। शहर के महारानी अस्पताल से लेकर डिमरापाल मेडिकल कॉलेज और निजी क्लीनिकों में पीलिया के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि डॉक्टरी इलाज से ज्यादा लोग देसी इलाज, झाड़-फूंक पर भरोसा कर रहे हैं। शहर से लगे आड़ावाल गांव में महिला सरपंच के घर के बाहर सुबह से मरीजों की कतार लग रही है। लोग यहां पीलिया की जड़ी-बूटी वाली माला और दवा लेने पहुंच रहे हैं।
महारानी अस्पताल के ओपीडी आंकड़ों के अनसार रोजाना 15 से ज्यादा मरीज केवल पेट दर्द, उल्टी और हल्के बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। जब डॉक्टरों द्वारा इनकी लीवर फंक्शन टेस्ट और सीरम बिलीरुबीन की जांच कराई जा रही है, तो पीलिया की पुष्टि हो रही है। सामान्य तौर पर शरीर में बिलीरुबीन का स्तर 1.2 तक होना चाहिए, लेकिन अस्पताल पहुंच रहे मरीजों में यह आंकड़ा 5 से 12 तक पाया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। शहर में पीलिया बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन ने अब तक किसी विशेष जांच दल या रोकथाम अभियान की शुरुआत नहीं की है। अभी तक प्रभावित इलाकों को चिन्हांकित करने की शुरूआत भी नहीं हुई है और न ही पानी के सैंपल की जांच की जा रही है।
बस्तर जिले के सीएमएचओ संजय बसाक का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, अभी गिनती के ही मरीज सामने आए हैं। विभागीय अमला इसे लेकर सतर्क है। जहां ज्यादा मरीज मिलेंगे, वहां अभियान चलाया जाएगा।
जगदलपुर नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा ने बताया कि हफ्तेभर पहले 4 पीलिया के मरीज मिले थे। जांच में इलाके का पानी सही मिला है। स्वास्थ्य टीम ने रिपोर्ट नहीं दी है, जानकारी मिलती है तो पानी की जांच करवाएंगे। खाद्य सामग्रियों की भी जांच होगी।
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