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बस्तर दशहरा में कटे सैकड़ों पेड़ों की भरपाई के क्षतिपूर्ति पौधरोपण योजना बंद हुई

30 Oct 2026   7 Views

बस्तर दशहरा में कटे सैकड़ों पेड़ों की भरपाई के क्षतिपूर्ति पौधरोपण योजना बंद हुई

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जगदलपुर। रियासत कालीन बस्तर दशहरा में प्रति वर्ष एक नये रथ निर्माण की परंपरा के निर्वहन के लिए हर साल सैकड़ों पुराने पेड़ काटे जाते है, लेकिन अब उनके बदले पौधे लगाने की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं। बस्तर दशहरा के विशाल रथ के निर्माण के लिए प्रतिवर्ष लगभग सैकड़ो पुराने पेड़ों की कटाई की जाती है, इसके आड़ में भी बड़ा वारा-न्यारा होने की बात को नकारा नही जा सकता । परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए क्षतिपूर्ति पौधरोपण को आयोजन का स्थायी हिस्सा बनाने की जरूरत है। अन्यथा न परंपरा बचेगी और न ही पर्यावरण बचेगा । 
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से इन पेड़ों की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति पौधरोपण की परंपरा भी शुरू की गई थी। पिछले पांच वर्षों से बस्तर दशहरा समिति और वन विभाग ने मिलकर अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कराया। कुमड़ाकोट जंगल, मारकेल के बोदामुंडा और नकटी सेमरा जैसे स्थानों पर इस दिशा में पहल की गई थी। लेकिन दशहरा 2026 संपन्न होने के बाद अब तक क्षतिपूर्ति पौधरोपण को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। पर्यावरण संरक्षण समितियों के सदस्यों को आशंका है, कि वर्षों से चली आ रही यह पहल कहीं बंद न हो जाए। सवाल यह है कि जब रथ निर्माण के लिए हर साल पुराने पेड़ काटे जाते हैं, तो उनके बदले नए पेड़ लगाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? बस्तर दशहरा समिति, जिला प्रशासन और वन विभाग के बीच इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किए जाने के लिए कि जितनी पेड़ रथ निर्माण के लिए काटे गये, उससे अधिक पेड़ तो नही काटे जा रहे हैं, इसकी निगरानी की व्यस्था भी किए जाने की आवश्यकता है।

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