Share this post with:
जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में महुआ, इमली, कोसा बीनने वाले और 4 हजार साल पुरानी ढोकरा धातु कला व काष्ठ शिल्प को संजोने वाले जनजातीय युवाओं के लिए एवं उनके उत्पादों को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय और देश के प्रीमियर बिजनेस स्कूल आईआईएम कोलकाता के बीच एक ऐतिहासिक एमओयू होने जा रहा है। इस पहल के तहत बस्तर के उन आदिवासी युवाओं को चुना जाएगा, जो स्थानीय वनोपज, पारंपरिक कला-संस्कृति और स्थानीय समस्याओं के समाधान पर आधारित स्टार्टअप या व्यवसाय खड़ा करना चाहते हैं। उक्त जानकारी बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के माध्यम से दिया गया है।
चयनित युवाओं को आईआईएम कोलकाता अपने कैंपस ले जाकर विश्वस्तरीय इनक्यूबेशन और बिजनेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देगा, जिसके बाद उनके प्रोजेक्ट्स के लिए 1 लाख से लेकर 5 करोड़ तक की पूंजी (फंडिंग) उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ती बस्तर के महुआ, इमली, कोसा और ढोकरा शिल्प की भारी मांग को सीधे भुनाया जा सकेगा। बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि बस्तर के आदिवासी युवाओं में नैसर्गिक प्रतिभा और हुनर की कोई कमी नहीं है। वे पीढिय़ों से जंगलों के उत्पाद और विश्वप्रसिद्ध कलाकृतियों को तैयार करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सही बिजनेस मार्गदर्शन और बड़ा कैपिटल नहीं मिल पाता था। अब तक बस्तर से निकलने वाले कच्चे महुआ, इमली और शिल्पकला का बड़ा लाभ बाहरी व्यापारी और बिचौलिए उठाते रहे हैं। आईआईएम की मेंटरशिप में 05 करोड़ तक की पूंजी और एपीडा व ट्राइफेड के ग्लोबल लिंकेज से जुड़कर अब स्थानीय आदिवासी युवा स्वयं की प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग प्लांट और एक्सपोर्ट फर्म स्थापित कर सकेंगे।
Share this post with:
06 Nov 2026 20 Views
07 Nov 2026 30 Views
05 Nov 2026 31 Views
04 Nov 2026 45 Views
03 Nov 2026 79 Views