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बशीर जी जेहन में हमेशा रहेंगे

28 May 2026   20 Views

बशीर जी जेहन में हमेशा रहेंगे

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बशीर बद्र, उर्दू जुबान  के बहुत बड़ेहस्ताक्षर है, ईद के दिन जब लोग मिलते है वे जमाने से रुखसत हो गए। यूँ तो उनके कलम से न जाने कितनी गजलों ने आकार लिया लेकिन उनकी ये गजल दिलो दिमाग में घूमती है।

 

यूँ ही बे-सबब न फिरा करो, कोई शाम घर में भी रहा करो वो $गज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो

कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से ये नये मिज़ाज का शहर है, ज़रा $फासले से मिला करो

अभी राह में कई मोड़ हैं, कोई आयेगा कोई जायेगा तुम्हें जिसने दिल से भुला दिया, उसे भूलने की दुआ करो

मुझे इश्तहार-सी लगती हैं, ये मोहब्बतों की कहानियाँ जो कहा नहीं वो सुना करो, जो सुना नहीं वो कहा करो

कभी हुस्न-ए-पर्दानशीं भी हो ज़रा आशि$काना लिबास में जो मैं बन-सँवर के कहीं चलूँ, मेरे साथ तुम भी चला करो

ये ख़िज़ाँ की ज़र्द-सी शाम में, जो उदास पेड़ के पास है ये तुम्हारे घर की बहार है, इसे आँसुओं से हरा करो

नहीं बे-हिजाब वो चाँद-सा कि नज़र का कोई असर नहीं उसे इतनी गर्मी-ए-शौक से बड़ी देर तक न तका करो

बशीर जी जेहन में हमेशा रहेंगे।

0-- संजय दुबे

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