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0-सीबीआई ने दिया इंटरविनर बनने का आवेदन हाई कोर्ट ने किया स्वीकार
जबलपुर। भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा की दहेज हत्या के अपराध में आरोपित सास पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश, भोपाल गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के विरुद्ध प्रदेश सरकार व मृतिका के पिता की तरफ से दायर की याचिकाओं पर हाईकोर्ट में बुधवार को लगभग पौने तीन घंटे तक सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखने का निर्देश जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के अपराध में मिली अग्रिम जमानत अर्जी को निरस्त किए जाने की मांग करते हुए उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि वह अग्रिम जमानत की शर्तों का पालन नहीं कर रही है।
पुलिस ने उन्हें 13 मई से 23 मई के बीच पांच नोटिस दिये थे। इसके अलावा उन्होंने 18 मई को प्रेस कांफ्रेंस कर मृतिका के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाये थे। वह भौतिक साक्ष्य जांच एजेन्सी को उपलब्ध नहीं करवा रही है। जमानत मिलने के बाद भौतिक साक्ष्य को नष्ट कर रही है।सीबीआई की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश करते हुए अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करने मांग की गयी। सीबीआई के ओर से तर्क दिया गया कि त्विषा के पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की रिश्ते में लगने वाली बहन व एक अन्य व्यक्ति मौजूद था। जिन्हें उपस्थित नहीं रहना चाहिए था और यह जांच का विषय है। इसके अलावा दोनों आरोपितों को क्रास एग्जामिनेशन के लिए उनकी अभिरक्षा आवश्यक है।
अनावेदिका गिरिबाला सिंह की ओर से तर्क दिया गया कि त्विषा डाक्टरों ने एंजायटी,ड्रग्स के कारण उसकी स्थिति को देखते हुए गर्भपात की गोलियां दी थी। त्विषा अकेले रहना चाहती थी और जिसे मंजिल में उसने फांसी लगाई वही उसका चिकन,बाथरूम व बेडरूम था।घटना के दूसरे दिन 13 तारीख को पुलिस ने उसे सीज कर दिया था। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि गिरीवाला सिंह तथा उसके बेटे ने यूपीआई के माध्यम से शादी के बाद त्विषा को सात लाख रुपये से अधिक दिये है।
त्विषा ने कभी भी अपनी सास पर दहेज मांगने तथा प्रताडि़त करने की बात मायके पक्ष वालों से नहीं कही थी। त्विषा के सभी आरोप अपने पति के खिलाफ है सास के खिलाफ नही। इसके अलावा वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है।
प्रदेश सरकार की तरफ से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता व महाधिवक्ता प्रशांत सिंह,याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा तथा अनावेदिका की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रामा कृष्णन पैरवी के लिए उपस्थित हुए।
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