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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से पूर्व जज गिरिबाला सिंह को फिलहाल राहत मिल गई है। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण सिंह की एकलपीठ ने सोमवार को पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग पर होने वाली सुनवाई को आगामी 27 मई तक के लिए आगे बढ़ा दिया है। इसके साथ ही माननीय अदालत ने इस संवेदनशील मामले से जुड़े दो अलग-अलग आवेदनों पर एक साथ (संयुक्त रूप से) सुनवाई करने की व्यवस्था दी है।
पूर्व जज की अग्रिम जमानत को खारिज कराने के लिए हाई कोर्ट में दो अलग-अलग पक्षों की तरफ से आवेदन लगाए गए हैं।
पहला आवेदन: यह याचिका त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर की गई है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि नवनिधि शर्मा के आवेदन पर अभी तक नोटिस सर्व (तामील) नहीं हो पाया था, जिसके चलते कोर्ट में ही गिरिबाला सिंह के वकील ने इस नोटिस को प्राप्त किया।
दूसरा आवेदन: यह याचिका राज्य सरकार (पुलिस प्रशासन) की ओर से दायर की गई है। राज्य सरकार द्वारा लगाए गए इस आवेदन पर अनावेदक को नोटिस पहले ही सर्व हो चुका है।
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पाया कि दोनों ही आवेदनों में गिरिबाला सिंह के खिलाफ लगाए गए कानूनी ग्राउंड (आधार) बिल्कुल पृथक हैं.
सरकार का आरोप (जांच में असहयोग):- राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई है कि भोपाल कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद से ही पूर्व जज गिरिबाला सिंह पुलिस जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही हैं। इसके साथ ही उन पर जमानत की शर्तों के विपरीत मीडिया में लगातार बयानबाजी करने का भी आरोप है।
पिता का आरोप (साक्ष्यों से छेड़छाड़): दूसरी तरफ, मृतका त्विषा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा का आरोप है कि गिरिबाला सिंह रसूखदार होने के कारण केस से जुड़े साक्ष्यों और गवाहों के साथ छेड़छाड़ कर रही हैं।
इन तमाम दलीलों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भोपाल की निचली अदालत से पूर्व में गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को तत्काल प्रभाव से निरस्त (कैंसिल) कर दिया जाए। अब इस पूरे मामले पर हाई कोर्ट 27 मई को अपना अगला रुख साफ करेगा।
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