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00 बिहान से जुड़कर पशुपालन और सब्जी उत्पादन को बनाया आय का जरिया, सालाना आय ढाई लाख रुपये तक पहुंची
रायपुर। लगन, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर की श्रीमती निधि तिवारी की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। पशुपालन और सब्जी बाड़ी के जरिए उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए और अब उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है।
श्रीमती निधि तिवारी जून 2023 से दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की अध्यक्ष हैं। स्व सहायता समूह से जुडऩे के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से प्राप्त 10 हजार रुपये की सहायता से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। उनकी गाय से प्रतिदिन लगभग 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला। इसके छह महीने बाद निधि को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि में अपनी बचत और अन्य संसाधन जोड़कर सब्जी बाड़ी का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया।
टमाटर की खेती से बढ़ी आमदनी
निधि तिवारी ने मार्च माह में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने टमाटर की बिक्री शुरू की। उन्हें लगभग 40 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बेचकर अच्छी आमदनी हो रही है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन ने उनकी आय को विविध बनाया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की। निधि बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुडऩे के बाद उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, समूह का सहयोग और नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि आज वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने सपनों को भी आगे बढ़ा पा रही हैं।
महिला स्व सहायता समूहों से आजीविका को मिल रहा आधार
निधि तिवारी का अनुभव उस व्यापक ग्रामीण आजीविका ढांचे से जुड़ा है, जिसमें स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल, आजीविका और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसी उद्देश्य से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से संगठित करता है। लखपति दीदी पहल इसी मिशन का परिणाम है, जिसमें महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाने पर जोर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूह आधारित आजीविका मॉडल, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता पर विशेष जोर दिया है।
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बिहान से महिलाओं को मिल रहा मंच
छत्तीसगढ़ में बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका गतिविधियों के लिए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आत्मनिर्भरता से जोडऩे पर जोर दिया है। 2026 में आयोजित लखपति दीदी संवाद में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वावलंबन, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से महिलाओं के आगे बढ़ाने की बात कही थी।
परिवार के सपनों को पूरा करने की राह पर निधि
निधि तिवारी कहती हैं कि मेहनत के साथ यदि सही अवसर और सहयोग मिले तो गांव में रहकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। स्व सहायता समूह से मिली सहायता ने उन्हें पशुपालन और सब्जी बाड़ी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज दूध उत्पादन और टमाटर सहित मौसमी सब्जियों की खेती से होने वाली आय उनके परिवार के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। निधि तिवारी की कहानी बताती है कि स्व सहायता समूह, वित्तीय सहायता, स्थानीय संसाधनों और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। पशुपालन से शुरू हुआ उनका सफर सब्जी बाड़ी तक पहुंचा और अब वे लखपति दीदी की पहचान के साथ अपने परिवार के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह तैयार कर रही हैं।
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