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रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त व सुरक्षित आय का एक बेहतरीन माध्यम बनता जा रहा है। शासन की जनहितैषी योजनाओं का लाभ उठाकर ग्राम मंगापेठा निवासी श्री प्यारेलाल यादव ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है।
सीमित कृषि आय से डेयरी उद्यमिता तक का सफर
प्यारेलाल यादव पहले केवल पारंपरिक कृषि कार्य के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। कृषि से सीमित आय होने के कारण उन्हें अक्सर आर्थिक तंगहाली और परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी बीच उन्हें पशुधन विकास विभाग की श्राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजनाश् की जानकारी मिली। योजना के प्रावधानों से प्रभावित होकर उन्होंने डेयरी व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखने का निर्णय लिया।
मेहनत रंग लाई 2 गायों से बढ़कर हुआ 8 पशुओं का कुनबा
प्यारेलाल ने अपने व्यवसाय की शुरुआत महज दो गायों के पालन से की थी। उचित देखरेख के चलते धीरे-धीरे दूध का उत्पादन बढऩे लगा और उनकी आय में भी लगातार वृद्धि हुई। व्यवसाय से होने वाली बचत का सही उपयोग करते हुए उन्होंने दो अतिरिक्त गायें और खरीदीं। आज उनके पास कुल 8 गौवंशीय पशु हैं। इस व्यवसाय से उन्हें अब प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से भविष्य की राहें आसान
पशुधन विकास विभाग के सहयोग और कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के माध्यम से उनकी गायों से तीन उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म हुआ है। इससे उनके पास दुधारू मवेशियों की संख्या स्वत: बढ़ेगी, जिससे भविष्य में डेयरी व्यवसाय के और अधिक विस्तार की संभावनाएं पुख्ता हो गई हैं। प्रगतिशील पशुपालक श्री प्यारेलाल यादव ने बताया कि पशुपालन ने मुझे और मेरे परिवार को नियमित आय का एक ठोस साधन दिया है। अब मैं अपने इस व्यवसाय को और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा हूँ। सरकार की यह योजना हम जैसे छोटे किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। प्यारेलाल यादव की यह शानदार सफलता यह साबित करती है कि यदि शासन की कल्याणकारी योजनाओं को सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बनकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
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