CNIN News Network

पर्यावरण की रक्षा करना, उससे प्रेम करना भी हमारा धर्म हैं - इन्द्रेश जी महाराज

22 Sep 2026   82 Views

पर्यावरण की रक्षा करना, उससे प्रेम करना भी हमारा धर्म हैं - इन्द्रेश जी महाराज

Share this post with:


0- पवित्रता के साथ स्वच्छता पर ध्यान देने लगे तो स्वर्ग से भी सुंदर हो जायेगा हमारा भारत
0- रोज महाप्रसाद का एक तिनका भी ग्रहण करते हैं वो सीधे महाप्रभु की चित्त को धारण करते हैं
रायपुर। श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से प्रसिद््ध भागवताचार्य श्री इन्द्रेश जी महाराज पर्यावरण के प्रति बड़ा संदेश व्यासपीठ से दे गए। उन्होंने कहा कि बृजलीला के द्वारा ठाकुर जी पंच तत्वों से जागरुकता फैला रहे हैं उन्ही पंच तत्वों से जिनसे हमारा शरीर बना है पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश। उन्होने पृथ्वी के सरंक्षण के लिए हमें भेजा है लेकिन हम उसी पृथ्वी का नाश कर रहे हैं। भारत में हम लोग पवित्रता पर तो ध्यान दे रहें लेकिन स्वच्छता पर नहीं। पवित्रता भगवान की पत्नी हैं, उन्हे पवित्र रखना भी हमारा धर्म है। आज तो वृंदावन के यमुना में आचमन तक करना मुश्किल हो गया है इतनी विषैली हो गई है वहां की जल। यहां से विषैली कालिया नाग को भगाने के लिए भगवान ने उसका वध किया था, लेकिन आज के कालिया नाग यमुना क्या अन्य नदियों को भी विषैली कर रहे हैं। विषय आप समझ सकते हैं। मिट्टी खाकर भी परमात्मा ये संदेश दे रहे है कि पर्यावरण से उन्हे कितना प्रेम हैं। भारत में यदि पवित्रता के साथ स्वच्छता पर हम सब ध्यान देने लगे तो यह स्वर्ग से सुंदर हो जायेगा। भागवत का उद्देश्य परम धर्म है, ठाकुर जी से संबंध मांगकर प्रेम स्थापित करिए। वैसे ही पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा धर्म है, पर्यावरण से प्रेम रखिए। 

पर्यावरण की रक्षा करना, उससे प्रेम करना भी हमारा धर्म हैं - इन्द्रेश जी महाराज

कृषि मंडी देवेन्द्रनगर कथा स्थल में दूसरे दिन कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि आजकल कुछ लोग तो गीत गोविंद को लेकर ही कुछ भी बातें करने लगे हैं, अनर्गल प्रमाण देने का स्वभाव बन गया है। सनातन धर्म के बड़े लोग आवाज नहीं उठा रहे हैं इसलिए आज हमें पूर्व आचार्यों के शरणों में जाना होगा। जयदेव महाप्रभु से लेकर जगन्नाथ भगवान तक की ओर से कुछ गीत के बोल सुनाते हुए कहा कि...श्री राधे कृष्ण हरि गोविंद गोपाला, नंदजी को लाला-यशोदा का लाला। जय जगन्नाथ-जय जगन्नाथ..। जय जय श्री राधे। 
उन्होने बताया कि जगन्नाथ जी प्रभु आज श्राद्ध रुप में हैं,उनकी व्याख्या आगे बताते हुए कहा कि पितरों की प्रति जो श्रद्धा होती है उसे ही श्राद्ध कहते हैं। हमारे बड़े बुजुर्ग जो अब इस दुनिया में नहीं रहे, फिर भी वे अपनी परिवार की रक्षा के लिए खड़े रहते हैं। परिवार में किसी भी प्रकार के कष्ट या विपत्ति को आने से रोकते हैं। यहां भी कथा के अंतिम दिवस आते-आते श्राद्ध पक्ष शुरु हो जायेगा। आप भी अपने पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करिए जो भी नियम हैं। अपनी सनातन परम्परा को मत भूलिए। इस कथा में भगवान जगन्नाथ स्वंय विराजित है इसलिए वे तो कहते हैं इस कथा को -जगन्नाथ रायपुर आगमन महोत्सव -नाम दे देना चाहिए। महाप्रसाद बनने से लेकर भोग अर्पण और वितरण तक का बहुत सुंदर वर्णन और महिमा उन्होने बतायी। एकादशी व्रतधारण करने वाले तक महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। 

पर्यावरण की रक्षा करना, उससे प्रेम करना भी हमारा धर्म हैं - इन्द्रेश जी महाराज

स्कंध पुराण में महाप्रसाद की महिमा बताते हुए कहा गया है कि जो लोग रोज महाप्रसाद का एक तिनका भी ग्रहण करते हैं वो सीधे महाप्रभु की चित्त को धारण करते हैं। ध्यान रखें जिस दिन से महाप्रसाद ग्रहण कर लिया कुछ भी अनर्गल नहीं करना नहीं तो तो अपराध लगेगा। जैसे मांस-मदिरा व गलत कार्यों से दूर रहें। कथा के पांचवे दिन यहां भी महाप्रसादी का वितरण होगा और संभवत: पहली बार होगा कि इतने सारे वैष्णवों को एक साथ महाप्रसाद रायपुर में बंटेगा। उन्होने आयोजकों से जगन्नाथपुरी से मंगवाने कह दिया है। तब तक बस हम सब गाते रहे. गाते हो जगन्नाथ..तुम न संभालें तो कौन संभाले की गीत पर पूरा कथा स्थल गोते लगाने लगा। 
आज की तिथि में एकादशी है उसे प्रवर्तनीय एकादशी कहते हैं इस दिन ठाकुरजी करवट ले रहे हैं। प्रसंगवश उन्होने ये भी बताया कि जो जीवन भर ठाकुर जी के लिए जीते हैं उनकी अंतिम विदाई भी इस दुनिया से विशेष दिन में ही होती है जैसे कि एकादशी। आज लोग मनोकामना पूर्ण के लिए व्रत करने लगे हैं, इसे स्वार्थभक्ति कहते हैं। अन्न, जल, पादुका जैसे और भी चीजों का त्याग करते हैं, लेकिन क्या ठाकुर जी अनभिज्ञ हैं वे सब जानते हैं। 

पर्यावरण की रक्षा करना, उससे प्रेम करना भी हमारा धर्म हैं - इन्द्रेश जी महाराज

प्रभु की कृपा से होगा महाप्रसाद का वितरण
कथा के आयोजक गुंजन प्रजापति ने कहा कि व्यासपीठ के आर्शिवाद व जगन्नाथ प्रभु की कृपा से महाप्रसाद वितरण का कार्य निश्चित रुप से पूरा होगा। श्रद्दालुजनों ने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया। प्रजापति परिवार के सदस्यों ने कथा प्रारंभ होने से पूर्व व्यासपीठ की आरती की और आर्शिवाद प्राप्त किया। 

पर्यावरण की रक्षा करना, उससे प्रेम करना भी हमारा धर्म हैं - इन्द्रेश जी महाराज

कथा में आज संतजनों की रही विशेष उपस्थिति
कथा श्रवण करने के लिए आज काफी संख्या में संतजन पहुंचे थे। इन्द्रेश जी महाराज के पिताश्री श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री (ठाकुर जी) महाराज भी वृंदावन से पहुंचे। व्यासपीठ से उनका स्वागत किया गया। श्रद्दालुओं को इन्द्रेश जी ने उनका परिचय सद्गुरुदेव के रुप में कराया।

Share this post with:

AD R.O. No. - 13997/18

POPULAR NEWS

© 2022 CNIN News Network. All rights reserved. Developed By Inclusion Web