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00 मराठी मेले में मामा, मौसी, काका और बुआ के खत्म होते रिश्तों पर विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों ने जताई चिंता
रायपुर। परिवार विघटन वह स्थिति है, जब पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चों या परिवार के अन्य सदस्यों के बीच के आपसी संबंध, प्रेम, विश्वास और सामंजस्य टूट जाते हैं या चरम सीमा तक तनावपूर्ण हो जाते हैं। इससे परिवार की एकता और उसकी सामान्य संरचना समाप्त होने लगती है। आज मामा, मौसी, काका और बुआ जैसे रिश्ते खत्म होते जा रहे हैं। कहीं न कहीं एकल परिवार में पली बढ़ी युवा पीढ़ी का कैरियर बनाने के जुनून पर इसका दारोमदार टिका है। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित मराठी सोहळा (मेला) में मराठी समाज के नागरिक संवाद में आए पदाधिकारियों ने इस संदर्भ में चिंता व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 'परिवार विघटन और खत्म होते इन रिश्तों का भयावह स्वरूप देख भावी पीढ़ी हमें दोष देगी इसलिए समय रहते इस ओर कदम हमें ही बढ़ाना होगा।
महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि आज की पीढ़ी अपने कैरियर को लेकर एक बच्चा ही प्लान कर रही है। ऐसे में सबसे पहले उस बच्चे की भावी पीढ़ी को मामा, मौसी, काका और बुआ जैसे रिश्तों की दरकार होगी। यह वह रिश्ते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के आपके सुख और दुख में साथ खड़े होते हैं। जरूरी नहीं हर रिश्ता सिर्फ आर्थिक दृष्टिकोण से काम आए। मानसिक रूप से भी इनकी उपस्थिति व्यक्ति को संबल प्रदान करती है। जिन लोगों के माता-पिता गुजर गए हैं, उन्हें तो मामा, मौसी, काका और बुआ में अपने माता-पिता नजर आते हैं। वहीं उनका सहारा भी बनते हैं। आज हमें भावी पीढ़ी के बारे में सोचते हुए इस जनरेशन को यह बताना होगा कि कम से कम दो बच्चे अवश्य हो, ताकि उनकी भावी पीढ़ी इन रिश्तों के अभाव में न रहे।
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