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00 यूनिपोल-होर्डिंग सहित आय के नए स्रोतों को मिलेगा बढ़ावा
धमतरी। ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और विकास कार्यों के लिए अधिक सक्षम बनाने की दिशा में धमतरी जिले में स्वयं की आय बढ़ाने का अभिनव एवं परिणामोन्मुख मॉडल विकसित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों के अनुरूप पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से पंचायतों की उपलब्ध भूमि एवं परिसंपत्तियों का नियमानुसार उपयोग कर स्थायी आय के नए स्रोत तैयार किए जा रहे हैं। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा, सुशासन और आत्मनिर्भरता के संकल्प को स्थानीय स्वशासन के स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जिले में इस पहल के तहत मुख्य मार्गों, बाजार क्षेत्रों तथा शहर एवं प्रमुख आबादी क्षेत्रों के आसपास स्थित ऐसे स्थानों को चिन्हांकित किया गया है, जहां व्यावसायिक गतिविधियों की बेहतर संभावनाएं हैं। राजस्व अमले के माध्यम से भूमि का चिन्हांकन एवं पंचायतों के नाम आबंटन की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद भूमि की गाइडलाइन दर तथा प्रस्तावित व्यावसायिक दुकानों के निर्माण की लागत को आधार बनाकर पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप बेस रेट निर्धारित किया गया। पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से व्यावसायिक परिसरों के आबंटन की कार्रवाई की जा रही है। इससे पंचायतों को नियमित एवं दीर्घकालिक आय प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस मॉडल की खासियत यह है कि पंचायतों की परिसंपत्तियों को केवल निष्क्रिय संपत्ति के रूप में रखने के बजाय उन्हें आय सृजन के साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्थानीय जरूरत और संभावनाओं के अनुरूप व्यावसायिक परिसर, यूनिपोल, होर्डिंग तथा अन्य अनुमत गतिविधियों को पीपीपी मॉडल से जोड़ा जा रहा है। इससे एक ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पंचायतों के पास विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना स्थानीय स्वशासन को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। धमतरी जिले में पंचायत प्रशिक्षण कार्यक्रम को राज्य स्तर पर लागू किए जाने के साथ इसे शत-प्रतिशत डिजिटल स्वरूप में संचालित किया जा रहा है। समर्थ पोर्टल पर पंचायतों की प्रगति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों की उपलब्ध भूमि और परिसंपत्तियों का पारदर्शी, नियमसम्मत एवं जनहितकारी उपयोग करते हुए पीपीपी मॉडल के माध्यम से व्यावसायिक परिसरों का विकास किया जा रहा है, जिससे पंचायतों की स्वयं की आय में निरंतर वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि पंचायतों की आय बढऩे से स्वच्छता, पेयजल, स्थानीय अधोसंरचना, सामुदायिक परिसंपत्तियों के रखरखाव और अन्य जनहितकारी कार्यों के लिए पंचायतों को अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे। साथ ही वित्तीय अनुशासन, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और परिसंपत्ति प्रबंधन की संस्कृति भी मजबूत होगी।
यह पहल केन्द्र एवं राज्य सरकार की स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता, सुशासन और जनभागीदारी की भावना से भी जुड़ी है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं से गांवों में निर्मित परिसंपत्तियों और विकसित अधोसंरचना के बेहतर रखरखाव के लिए पंचायतों की स्वयं की आय महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय में वृद्धि 16वें वित्त आयोग की परफॉरमेंस ग्रांट प्राप्त करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में धमतरी जिले का यह नवाचार पंचायतों को केवल अनुदान आधारित व्यवस्था तक सीमित न रखकर आय सृजन, वित्तीय आत्मनिर्भरता और सशक्त स्थानीय शासन की दिशा में आगे बढ़ाने वाला मॉडल बन रहा है। जिले में स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप पीपीपी आधारित अन्य प्रस्तावों को भी नियमानुसार प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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