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कांकेर। जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक स्थित ग्राम मुरागांव में ईसाई धर्मांतरित परिवार की एक नाबालिग बालिका के निधन और उसके बाद किए गए अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि किशोरी का अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाजों से किया गया और इस प्रक्रिया में न केवल ग्राम सभा, बल्कि स्थानीय पंचायत को भी पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया। इस घटना के विरोध में ग्रामीणों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, मुरागांव निवासी ईसाई धर्मांतरित परिवार की किशोरी सीमा कोर्राम की मृत्यु के बाद परिवार ने न तो ग्राम पंचायत को सूचना दी और न ही ग्राम सभा की सहमति ली गई । लगभग दो दिनों के बाद जब ग्रामीणों को इस बारे में पता चला और उन्होंने पूछ-ताछ की, तो पता चला कि शव को भानुप्रतापपुर स्थित ईसाई कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मुरागांव पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां पेसा अधिनियम और छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम सभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन नियमों के बावजूद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और स्थल की जानकारी छिपाना कानून का सीधा उल्लंघन है।
ग्रामीणों का आरोप है कि धर्मांतरित परिवार द्वारा जानबूझकर पारंपरिक रीति-रिवाजों और गांव की संस्कृति को नजरअंदाज किया जा रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि यदि जांच में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो उस पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों को यह भी आशंका है कि क्या शव को गांव के जंगल में कहीं दफनाया गया है, जिसकी पुष्टि के लिए उन्होंने भानुप्रतापपुर कब्रिस्तान के तथ्यों के सत्यापन की मांग की है।
पंचायत सचिव ललित कुमार के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक शिकायत करेंगे। अब इस संवेदनशील मामले पर सबकी नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। कांकेर के ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरित परिवारों द्वारा ग्रामीण रीति-रिवाज और संस्कृति को न मानने के आरोप लगातार लग रहे हैं। इसी वजह से दो पक्षों में विवाद की स्थिति बन रही है। फिलहाल प्रशासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे प्रकरण पर अब सभी की नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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