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पंचतत्व में विलीन हुई पंडवानी गायिका तीजन बाई, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

05 Jul 2026   3 Views

पंचतत्व में विलीन हुई पंडवानी गायिका तीजन बाई, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

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00 मुक्तिधाम में लोगों ने गाया चोला माटी के हे राम...
रायपुर। पिछले कुछ वर्षों से अस्वस्थ चल रही प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्मश्री, पद्मभूषण से सम्मानित छत्तीसगढ़ की लोक कलाकार तीजन बाई का रविवार की तड़के रात 3.15 बजे एम्स रायपुर में निधन हो गया। शनिवार की रात में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनकी स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ली थी।उनके निधन से लोक कला क्षेत्र में एक रिक्तता आ गई जिसकी क्षतिपूर्ति करना संभव नहीं है। उनके निधन का समाचार मिलते ही दुर्ग स्थित उनके प्रशंसक और लोक कलाकारों चाहने वालों की भीड़ जमा हो गई। रविवार सुबह 11 बजे तीजन बाई के शव को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुक्तिधाम में लोगों ने चोला माटी के हे राम गीत गाया। इससे पहले पद्म विभूषण तीजन बाई को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी गई। तीजन बाई की अंतिम यात्रा में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। अपने प्रिय लोक कलाकार को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति पंडवानी को तीजन बाई ने अपनी अपनी दमदार आवाज, अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली के जरिए विश्व रंगमंच पर स्थापित किया था। लोककला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, फुकोका पुरस्कार समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट की मानद उपाधि भी प्रदान की थी। वर्ष 1980 में सांस्कृतिक राजदूत के रूप में उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, तुर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस की यात्राएं कर पंडवानी को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। दुशासन वध के प्रसंग पर उनकी प्रस्तुति आज भी दुनिया भर में सराही जाती है।
8 अगस्त 1956 को दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के अटारी गांव में जन्मी तीजन बाई का बचपन अभावों में बीता। महज नौ साल की उम्र में उन्होंने अपने चचेरे नाना बृजलाल पारधी से पंडवानी की शिक्षा शुरू की। सामाजिक विरोध, पारिवारिक संघर्ष और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और 13 वर्ष की आयु में पहला सार्वजनिक मंचन किया।
तीजन बाई का जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है - पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक जताया। उन्होंने एक्सा पर लिखा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
फूल अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, एसपी विजय अग्रवाल, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक ललित चंद्राकर, विधायक डोमलाल कोर्सेवाड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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