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न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले- विविधता में एकता ही भारत का असली डीएनए है

30 Aug 2026   16 Views

न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले- विविधता में एकता ही भारत का असली डीएनए है

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*  यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन कार्यक्रम में उक्त बातें कही

 

न्यूयॉर्क --राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में छह हजार से अधिक भारतीय-अमेरिकियों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए विविधता को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का मुख्य उद्देश्य विविधता में एकता को साकार कर पूरी दुनिया को इसका बोध कराना है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इस पर खुशी जताई जानी चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में 6,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता। उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं।

उन्होंने यह बात 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग फोरम द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।ÓÓ उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत को कौन-सी नियति मिली है?

भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है। करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''विविधता पर खुशी मनाई जानी चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। (साभार-प्रभासाक्षी)

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