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00 कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दी सही समय और सही मात्रा में उपयोग की सलाह
अंबिकापुर। कृषि क्षेत्र में नवाचार आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में नई संभावनाएं प्रदान कर रहा है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक न केवल फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ (मृदा विज्ञान) डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से दीर्घकाल में मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में नैनो उर्वरक आधुनिक कृषि के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ फसलों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराते हैं।
उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के माध्यम से किया जाता है। पौधे इसकी पत्तियों द्वारा पोषक तत्वों को सीधे अवशोषित करते हैं, जिससे इसकी उपयोग दक्षता पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में अधिक होती है। वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार नैनो यूरिया का उपयोग 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से किया जाना चाहिए तथा 500 मिलीलीटर की एक बोतल एक एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है।
डॉ. कुमार ने बताया कि बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए नैनो यूरिया का पहला छिड़काव फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में तथा दूसरा छिड़काव 55 से 60 दिन की अवस्था में किया जाना चाहिए। इससे फसलों की वृद्धि, विकास और उत्पादन क्षमता में सकारात्मक सुधार देखा गया है। नैनो डीएपी के संबंध में उन्होंने बताया कि यह फसलों को फास्फोरस उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम है। इसका उपयोग बीजोपचार और पर्णीय छिड़काव दोनों रूपों में किया जा सकता है। बीजोपचार के लिए 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा छिड़काव के लिए 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से उपयोग करने की अनुशंसा की गई है।
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