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आज का दौर आम पाठकों को डाटा ग्राफिक्स के जरिए तुलनात्मक रूप से जानकारी देने का जमाना है।तुलना हमेशा प्रेरणा देने के लिए ही नहीं की जाती है।एक पक्ष को तुलना अपने कारणों से बेहतर लगती है।यही तुलना दूसरों को अपने कारणों से दुखद लगता है।
10 जून 2026 का दिन भारतीय राजनीति में प्रधान मंत्री के कार्यकाल के हिसाब से महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1952 से लेकर अबतक के निर्वाचित प्रधानमंत्रियों के द्वारा लगातार प्रधानमंत्री बने रहने के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे।
पंडित जवाहर लाल नेहरू 1952 के पहले, 1957 दूसरे और 1962 के तीसरे लोकसभा चुनाव में बहुमत दल के नेता के रूप में प्रधान मंत्री चयनित किए गए थे। नरेंद्र मोदी ने 2014,2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत दल के चयनित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे है।
जन्म के सालों के आधार पर नेहरू 63 और मोदी 64 साल की उम्र में निर्वाचित प्रधानमंत्री बने है।पंडित जवाहर लाल नेहरू 1952 में प्रधानमंत्री बने थे और मृत्यु पर्यंत 1964 तक देश के प्रधान मंत्री रहे। बारह साल और चौदह दिन का निरंतर कार्यकाल रहा था, पंडित जवाहर लाल नेहरू का।
नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बने थे और आज पर्यन्त तक प्रधानमंत्री है। उनका कार्यकाल बारह वर्ष और पंद्रह दिन का हो गया है। लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के हिसाब से निर्विवाद रूप ने नरेंद्र मोदी, देश के सर्वाधिक कार्यकाल वाले प्रधान मंत्री बन गए है।
राजनीति में बातो को अपने अपने संदर्भ में कहा जाता है। भाजपा और कांग्रेस के लिए आने वाला समय नेहरू वर्सेस मोदी तुलनात्मक रहेगा। दोनों तरफ से नेहरू, मोदी के द्वारा किए गए कार्यों का बखान और आलोचना किया जाएगा।
एक कहावत है कि हर व्यक्ति का अपना युग होता है जिसमें जो परिस्थितियां मिलती है बनती है उसके आधार पर मसौदे तैयार होते है, नीतियां बनती है, कार्य मूर्त रूप लेते है।
नेहरू और मोदी के समय में लगभग एक दलीय राजनीति का दौर रहा। नेहरू के कार्यकाल में विपक्ष के रूप में 1952से लेकर1962 तक कम्युनिस्ट पार्टी 16, 27 और 29 सीट के आधार पर मुख्य विपक्षी पार्टी थी।
2014 में नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री बने तो देश में कांग्रेस की स्थिति नेहरू के कार्यकाल में कम्युनिस्ट पार्टी के समान हो गई है। 44,52 और 99 सीट की जीत पिछले तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लोकसभा में सदस्य संख्या है।
जब विपक्ष नहीं के बराबर हो तो सत्ता पक्ष को बड़े मन से काम करने का अवसर मिलता है।इस मामले में नेहरू और मोदी भाग्यशाली रहे कि उनके सामने संख्या बल में कोई भी पार्टी नहीं रही।
नेहरू ने पंच वर्षीय योजना के आधार पर कृषि और उद्योग को प्राथमिकता दी। वो दौर आत्म निर्भरता का नहीं था, संसाधन और सोच दोनों सीमित थी। नेहरू को पाकिस्तान और चीन से युद्ध का सामना करना पड़ा। चीन से पराजय उनके लिए पीठ पर छुरा भोंकने वाला था।इस पराजय को वे झेल नहीं पाए और उनकी मौत का अप्रत्यक्ष कारण भी बना।
मोदी गुजरात से आते है। कारोबारियों का राज्य है।व्यापार में जोखिम मोल लेने वालो का राज्य है गुजरात।बतौर मुख्य मंत्री रहते हुए गुजरात मॉडल को मोदी ने चर्चित बना दिया था। देश के प्रधान मंत्री बने तो देश को स्वच्छ बनाने की दिशा में बहुत बड़ा काम किया। इस देश के नागरिकों को सिविक सेंस सिखाने में नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। महिलाओं को धुवां रहित रसोई देने में उन्होंने घरेलू गैस सुविधा उपलब्ध कराई। विदेशों में देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाने में वे सफल हुए।अमेरिका जैसा देश जो भारत के प्रधानमंत्रियों को विदेश सचिव स्तर का मानता था, उसे झकमारी ही सही मान सम्मान देना पड़ा। एक सौ छियालिस करोड़ के उपभोक्ता बाजार को दुनियां का कोई देश नकार नहीं सकता है।ये बात नरेंद्र मोदी ने दुनियां को समझाया है। आप ये भी मान सकते है कि नरेंद्र मोदी ब्रांडेड प्रधानमंत्री है जिनकी वैश्विक बाजार से लेकर देश में किए जाने कार्य की ब्रांडिंग है। ऐसा भी होता तो देश के बीस राज्यों में उनके पार्टी की सरकार नहीं होती।
0- संजय दुबे
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