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नारायणपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित खड़कागांव में ईसाई धर्मांतरण को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार शांत हो गया। आज मंगलवार काे दिनभर चली चर्चा के बाद संबंधित परिवार के पिता-पुत्र ने आदिवासी समुदाय के पारंपरिक (मूल) धर्म को पुनः स्वीकार कर लिया, जिसके बाद गांव में सामान्य स्थिति बहाल हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गांव के एक परिवार के कुछ सदस्य मूल धर्म छोड़कर दूसरे इसाई पंथ को मान रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और परिवार को गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया गया था। परिवार में कुल सात सदस्य हैं, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची तथा एहतियात के तौर पर गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
नारायणपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) सुशील नायक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मंगलवार सुबह से धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। ग्रामीणों की समझाइश के बाद पिता-पुत्र ने आदिवासी समुदाय के पारंपरिक (मूल) धर्म को पुनः स्वीकार कर लिया है। इसके बाद गांव में शांति स्थापित हो गई है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
उल्लेखनिय है कि इससे पहले भरंडा गांव में भी धर्मांतरण को लेकर विवाद सामने आया था, जहां 26 परिवारों को गांव छोड़ने का फरमान सुनाए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद कराया गया था। जिला प्रशासन की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई थी। उस समय प्रशासन ने एक माह का समय देकर आगे पुनः बातचीत करने का निर्णय लिया था। जिले में हाल के समय में धर्मांतरण और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं को लेकर कई गांवों में विवाद की स्थिति सामने आई है, जिसे देखते हुए प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कई क्षेत्रों में ईसाई धर्म अपनाने वाले लोगों को पुनः मूल धर्म में लाने के अभियान तेज होने की चर्चा है। इसी क्रम में कई गांवों में सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है। कुछ स्थानों पर अंतिम संस्कार और दफन के लिए भूमि को लेकर भी विवाद सामने आ चुके हैं।
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