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* संजय दुबे
हिंदुस्तान के संविधान में केंद्रीय और राजकीय सरकार की व्यवस्था है।राजनैतिक रूप से दोनों स्थानों में सरकार चलाने के लिए संख्या बल पर हासिल करने वाली पार्टी अपना नेता चुनती है। केंद्र में ये व्यक्ति प्रधान मंत्री और राज्य में मुख्य मंत्री बनते है। हिंदुस्तान के संविधान में व्यवस्था है कि किसी भी व्यक्ति को संविधान की आहर्ता को पूर्ण करता हो उसे बिना निर्वाचित हुए बहुमत दल प्रधान मंत्री या मुख्यमंत्री बना सकता है।ऐसे व्यक्ति को छः माह के भीतर निर्वाचित होने की अनिवार्यता रहती है। दूसरे तरीके में राज्यसभा का सदस्य प्रधान मंत्री बन सकता है। डा मनमोहन सिंह उदाहरण है। वे एक बार लोकसभा चुनाव दिल्ली से लड़े थे और हार गए थे। ऐसे राज्य जहां विधान परिषद है वहां का निर्वाचित व्यक्ति भी मुख्यमंत्री बन सकता है। उद्धव ठाकरे, विधान परिषद के माध्यम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे।
हिंदुस्तान के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बतौर मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री रहते हुए पच्चीस साल होने जा रहे है।वे देश के दूसरे ऐसे व्यक्ति है जो मुख्यमंत्री का पद छोड़ तुरंत प्रधान मंत्री बने है और छठवे ऐसे मुख्यमंत्री है जो कालांतर में देश के प्रधान मंत्री बने।
कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच डी देवगौड़ा, पहले ऐसे व्यक्ति रहे है। इन्होंने 31 मई 1996 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर 1 जून 1996 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। दूसरे ऐसे व्यक्ति नरेंद्र मोदी रहे।मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे 22 मई 2014 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान निर्मित होने के बाद पहले लोक सभा चुनाव से निर्वाचित होने वाले प्रधान मंत्रियों में नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री रहे है जिनका निरंतरता के मामले में उनका कार्यकाल सर्वाधिक अवधि बारह साल तीन महीने तेईस दिन का है। पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रथम लोकसभा चुनाव 1952 से 1964 तक लगातार देश के निर्वाचितप्रधान मंत्री के रूप में बारह वर्ष एक माह दस दिन तक कार्य किए थे। उनका रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी ने तोड़ दिया है। दोनों ही प्रधान मंत्री लगातार तीन अवधि में हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री रहे है।
आइए,उन मुख्यमंत्रियों पर नज़र डाले जो राज्य के मुख्यमंत्री होने के बाद देश के प्रधानमंत्री बने
*मोरारजी देसाई 1977 में देश के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। कालांतर में वे बॉम्बे राज्य (अब महाराष्ट्र और गुजरात) के मुख्य मंत्री थे। मोरार जी देसाई चार साल, छ: माह, दस दिन तक मुख्य मंत्री रहे। वे 21 अप्रैल 1952 से 31 अक्टूबर 1956 तक तत्कालीन बॉम्बे स्टेट के मुख्यमंत्री रहे।
*चौधरी चरण सिंह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री रहे उनका पहला कार्यकाल 3 अप्रैल 1967 से 25 फरवरी 1968 तक रहा। बतौर मुख्यमंत्री चरण सिंह का पहला कार्यकाल दस माह तेइस दिन रहा।चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे। उनका दूसरा कार्यकाल 18 फरवरी 1970 से 2 अक्टूबर 1970 तक रहा। उनका दूसरा कार्यकाल भी सात माह15 दिन का रहा। देश के प्रधान मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक ( पांच महीने और सत्रह दिन) रहा। उनके प्रधानमंत्री पद से जुड़ी मुख्य बात ये है कि उन्होंने संसद का सामना नहीं किया। दूसरा वे भारत के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान लोकसभा के किसी भी सत्र का सामना नहीं किया।कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने की घोषणा के बाद, उन्होंने संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले 20 अगस्त 1979 को इस्तीफा दे दिया था, लेकिन नई सरकार बनने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहे।
*विश्वनाथ प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के 9 जून 1980 से 28 जून 1982 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। उनका कार्यकाल दो साल उन्नीस दिन रहा। देश के सातवें प्रधान मंत्री के रूप में विश्वनाथ प्रताप सिंह 2 दिसंबर 1989 को भारत के सातवें प्रधानमंत्री बने थे।प्रधान मंत्री पद पर10 नवंबर 1990 तक रहे।प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ग्यारह माह आठ दिन रहा।
*पी.वी. नरसिम्हा रावआंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री के रूप में 30 सितंबर 1971 से 17 जनवरी 1973 तक रहे थे। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल दो साल तीन माह सत्रह दिन रहा। नरसिम्हा राव 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री रहे।
*एच डी देवेगौड़ा,देश में मुख्य मंत्री के रूप में कार्य करने के बाद प्रधान मंत्री बनने वाले पांचवें व्यक्ति थे।वे 11 दिसंबर 1994 से 31 मई 1996 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे। उनका कार्यकाल दो साल पांच माह 20 दिन रहा एक जून 1996– इक्कीस अप्रैल 1997 तक देवेगौड़ा हिंदुस्तान के प्रधान मंत्री रहे।
*नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 7 अक्टूबर 2001 से 21 मई 2014 तक रहे । गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनका चार कार्यकाल रहा जिसमें पहला कार्यकाल एक साल तीन माह और बीस दिन का रहा। अगले तीन विधान सभा चुनाव में उनकी पार्टी ने उन्हें मुख्य मंत्री बनाया। मुख्यमंत्री रहते रहते वे लोकसभा चुनाव में विजयी होकर भारतीय जनता पार्टी के बहुमत दल के नेता के रूप में प्रधान मंत्री बनाए गए।
मुख्यमंत्री से प्रधान मंत्री का सफर तय करने वालो में केवल नरसिम्हा राव कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते थे। मोरार जी देसाई कांग्रेस के मुख्य मंत्री थे लेकिन प्रधान मंत्री जनता दल से बने। शेष चार गैर कांग्रेसी दल से प्रतिनिधित्व करते है। एक बात और छ मुख्यमंत्री जो प्रधानमंत्री बने उनमें केवल नरसिम्हा राव और नरेंद्र मोदी ही पूरे पांच साल प्रधान मंत्री रहे शेष सबकी सरकार समर्थन वापस लेने के कारण गिर गई
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